इंडोनेशिया की संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की नीति पर चलता है। उन्होंने कहा कि भारत का मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास’ है और यही सोच दुनिया के साथ उसके संबंधों की नींव है। पीएम ने लोकतंत्र, शांति और साझा विकास को दोनों देशों की सबसे बड़ी ताकत बताया।
साझा विरासत और समुद्री रिश्तों का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते सदियों पुराने हैं। रामायण, महाभारत, नालंदा, गरुड़, बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे सांस्कृतिक प्रतीक दोनों देशों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र दोनों देशों के बीच दूरी नहीं, बल्कि साझेदारी और भविष्य का सेतु है।
आतंकवाद और इंडो-पैसिफिक पर साझा रुख
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र और समावेशी व्यवस्था का समर्थन दोहराया और बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 25 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत की 100 से अधिक कंपनियां इंडोनेशिया में काम कर रही हैं।
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सभ्यता संवाद और भविष्य की साझेदारी का प्रस्ताव
पीएम मोदी ने भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद (India-Indonesia Civilisation Dialogue) शुरू करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने ‘गंगा-महाकम विजन’ का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश अपनी साझा विरासत को नई पीढ़ी की ताकत बनाएंगे। इससे पहले इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से भी सम्मानित किया।