प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर हैं। इस यात्रा की शुरुआत इंडोनेशिया से हो रही है, जो भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का अहम साझेदार माना जाता है। प्रधानमंत्री का यह इंडोनेशिया का चौथा दौरा है, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों का महत्व साफ दिखाई देता है। इस यात्रा में कई अहम समझौतों पर चर्चा होने की संभावना है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर रहेगा फोकस
भारत और इंडोनेशिया पिछले कुछ वर्षों से रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, अधिकारियों की ट्रेनिंग और समुद्री सुरक्षा पर साझेदारी बढ़ी है। इस दौरे में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की संभावित डील पर भी नजर रहेगी। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी बातचीत हो सकती है।
क्रिटिकल मिनरल और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े निकेल भंडार वाले देशों में शामिल है। इसके अलावा वहां कॉपर, बॉक्साइट और टिन जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। भारत इलेक्ट्रिक व्हीकल और हाई-टेक उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए इन खनिजों तक बेहतर पहुंच चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में द्विपक्षीय कारोबार 24 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। भारत की 130 से ज्यादा कंपनियां इंडोनेशिया में निवेश कर रही हैं।
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हिंद-प्रशांत में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक भूमिका
मलक्का जलडमरूमध्य के पास इंडोनेशिया की रणनीतिक स्थिति भारत के लिए बेहद अहम मानी जाती है। इसी क्षेत्र में भारत अंडमान-निकोबार और ग्रेट निकोबार परियोजनाओं के जरिए अपनी समुद्री क्षमता भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।