पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्य की जनता के नाम एक खुला पत्र जारी कर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। हिंदी और बंगला में लिखे इस संदेश में विकास, कानून-व्यवस्था, अवैध घुसपैठ, महिलाओं की सुरक्षा और CAA जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इसे चुनाव से पहले एक विजन स्टेटमेंट के रूप में देखा जा रहा है, जो सीधे मतदाताओं को संबोधित करता है।
‘सोनार बंगाल’ का सपना और विकास का दावा
प्रधानमंत्री ने पत्र की शुरुआत मां काली के जयकारे के साथ करते हुए बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में जनकल्याण और समग्र विकास को प्राथमिकता दी है। उनका दावा है कि किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के लिए चलाई गई योजनाओं का सकारात्मक असर दिखा है, भले ही राज्य सरकार का सहयोग सीमित रहा हो।
युवाओं का पलायन और महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
पत्र में युवाओं के रोजगार के लिए अन्य राज्यों में पलायन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। पीएम ने लिखा कि कभी औद्योगिक रूप से अग्रणी रहा बंगाल आज पिछड़ गया है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को भी अहम विषय बताया और कहा कि माताओं-बहनों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए। उनके अनुसार, आने वाला चुनाव राज्य की अगली पीढ़ी का भविष्य तय करेगा।
CAA और घुसपैठ पर स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री ने Citizenship Amendment Act का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के शिकार शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी चाहिए। साथ ही अवैध घुसपैठ को राज्य की बड़ी समस्या बताते हुए इसे रोकने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति, हिंसा और भ्रष्टाचार से बंगाल को मुक्त कर सुशासन की राह पर आगे बढ़ाना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक विरासत का हवाला और 2026 का लक्ष्य
पत्र में Subhas Chandra Bose, Rabindranath Tagore और Syama Prasad Mookerjee का उल्लेख करते हुए बंगाल की गौरवशाली परंपरा को याद किया गया। प्रधानमंत्री ने 2026 तक “विकसित पश्चिम बंगाल” बनाने का संकल्प दोहराया और जनता से इस परिवर्तन में सहभागी बनने की अपील की। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह पत्र आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है।