रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की मुलाकात को पीएम नरेंद्र मोदी की मुलाकात की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। खासकर अमेरिकी मीडिया में पुतिन और पीएम मोदी की चर्चाएं जोरों पर है। इसी कड़ी में अमेरिकी मीडिया हाउस ने पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात को भारत की ओर से अपनी रणनीतिक जरूरतों को साधने को अहम प्रदर्शन के तौर पर सामने रखा है।
भारत दौरे को मंजिल तक पहुंचाया
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, अमेरिका की तरफ से किए गए भौगोलिक दबाव ने रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे को मंजिल तक पहुंचाया। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की ओर से बयान सामने आया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात ऐसे वक्त परमें हुई जब अमेरिका रूसी तेल कंपनियों बैंन लगा रही हैं। इसकी वजह से भारत कम कीमत पर कच्चा तेल खरीद रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य आधार माना गया
भारत-रूस की ऊर्जा साझेदारी, जिसे 2022 से द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य आधार माना गया है। इस वक्त दबाव में है। अमेरिका ने रोसनेफ्ट और लुकोइल से जुड़े व्यापारियों पर कार्रवाई की। इसके बाद भारतीय रिफाइनर्स को अपनी कच्चे तेल की खरीद रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा को रिश्ते का मजबूत और जरूरी स्तंभ बताया
अमेरिकी मीडिया ने कहा कि इस दबाव के बावजूद भी दोनों नेताओं ने कच्चे तेल की खरीद-बिक्री जारी रखने का संकेत दिया। बता दें, रूसी राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर अपने संबोधन के दौरान कहा था कि भारत के लिए रूस से बिना रुकावट के कच्चे तेल की शिपमेंट जारी रहेगी। पुतिन ने पीएम मोदी के ऊर्जा सुरक्षा को रिश्ते का मजबूत और जरूरी स्तंभ बताया। इसके अलावा, वॉशिंगटन पोस्ट ने इस समिट को भारत की विदेश नीति के लिए एक खास पल बताया। वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, यह समिट रूस के साथ पुराने रिश्ते बनाए रखने की भारत की कोशिशों का एक टेस्ट था, वो भी तब जब अमेरिका यूक्रेन में शांति समझौते के लिए जोर दे रहा है।