आम का सीजन शुरु हो चुका है, भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है. खुद PM मोदी भी आम खाना खूब पसंद करते हैं, जिसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में किया था, लेकिन यही आम अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को रास नहीं आ रहा है और उन्होंने भारतीय आम की अमेरिका में एंट्री बंद करा दी है, जिससे किसानों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा है, ऐसा बताया जा रहा है कि डॉनल्ड ट्रंप को पाकिस्तानी आम बेहद पसंद आया है, तभी तो उन्होंने भारत के आम की अमेरिका में जाने पर पाबंदी लगा दी है.
15 जहाज आमों को बताया अमेरिका ने खराब
खबरों की मानें तो अमेरिका में पाकिस्तान से आने वाले आम को नहीं रोका जा रहा बल्कि भारतीय आम को सर्टिफिकेट में गलती का आरोप लगाकर रोक दिया गया. ऐसा बताया जाता है कि भारत से हर साल आम के सीजन के दौरान अमेरिका में औसतन 22 से 23,000 मेट्रिक टन आम का एक्सपोर्ट किया जाता है. इस साल भी आम का सीजन शुरू होते ही अमेरिका में आम का एक्सपोर्ट शुरू हो गया. लेकिन अमेरिका ने भारतीय आम की 15 खेपे रद्द कर दी. अमेरिका के तीन एयरपोर्ट्स, लॉस एंजेलिस, सैन फ्रांसिस्को और अटलांटा पर 15 जहाज आम को खराब बताकर वापस लेकर जाने का आदेश दिया गया. जिन आमों को खराब बताया गया कि उसकी कीमत करीब ₹4 करोड़ है. अब इन आमों को भारत वापस नहीं लाया जाएगा बल्कि वहीं नष्ट कर दिया जाएगा क्योंकि इसको वापस लाने में फिर से पैसे खर्च होंगे और इसके खराब होने की भी संभावना है. आश्चर्य की बात ये है कि भारतीय आम को जिस सर्टिफिकेट में गलतियों के आधार पर खराब बताकर रद्द किया गया उस सर्टिफिकेट को पहले अमेरिकी एजेंसी ने ही जारी किया था.
अमेरिकी एजेंसी ने ही जारी किया था सर्टिफिकेट
अमेरिका में जो भी फल भेजे जाते हैं. उसे एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना होता है. इस प्रक्रिया के तहत फलों के कीटाणु मारे जाते हैं. जब ये काम पूरा हो जाता है तो आम या दूसरे फलों को पीपीक्यू 203 सर्टिफिकेट दिया जाता है. ये सर्टिफिकेट यूएसएफडीए यानी कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ही देता है. भारतीय आम जो अमेरिका भेजे गए थे, उसे भी अमेरिकी सरकारी एजेंसी ने ही मुंबई में सर्टिफिकेट जारी किया था. ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि जिस सर्टिफिकेट को अमेरिका एजेंसी ने भारत में जारी किया उस सर्टिफिकेट को अमेरिका में क्यों खारिज कर दिया गया?