PNB Bank Fraud Case : पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा शाखा में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित फ्रॉड ने बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राहकों के सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बिना जानकारी के पैसे ट्रांसफर किए जाने के मामले ने बैंक के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। शुरुआती शिकायतों के मुताबिक, 21 ग्राहकों के खातों से 11.24 करोड़ रुपये से अधिक की रकम कथित तौर पर गायब हुई है। इस घटना के बाद अब बैंक की देशभर में फैली करीब 10,500 शाखाओं की सुरक्षा व्यवस्था और कामकाज की जांच कराने की मांग उठने लगी है।
21 ग्राहकों के खातों से निकले पैसे
ग्रेटर नोएडा की PNB शाखा में कई ग्राहकों ने शिकायत की थी कि उनके बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा रकम बिना अनुमति के ट्रांसफर कर दी गई। शुरुआती जानकारी में 21 लोगों को 11.24 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने की बात सामने आई। हालांकि, कुछ ग्राहकों ने इससे भी अधिक रकम गायब होने का दावा किया है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में बैंक की एक महिला कर्मचारी पर बाहरी लोगों के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। दावा है कि उसने ब्रांच मैनेजर और अन्य अधिकारियों के पासवर्ड का इस्तेमाल करके ग्राहकों के खातों से अनधिकृत लेनदेन किए।
कर्मचारी सस्पेंड, CBI से संपर्क
मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई लोगों को सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से भी संपर्क किया गया है। बैंक ने प्रभावित ग्राहकों को उनकी रकम वापस दिलाने का भरोसा दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 28 अक्टूबर तक तीन दावों के तहत कुल 43 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था। हालांकि, बाकी प्रभावित ग्राहकों की रकम और पूरे नुकसान का अंतिम आंकड़ा जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ये भी पढ़ें : 'अब कभी किसी प्रदर्शन में नहीं जाऊंगा...', Imran Khan ने कोर्ट में क्यों खाई कसम? जानें पूरा मामला
10,500 शाखाओं के ऑडिट की मांग
इस घटना के बाद ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन ने बैंक प्रबंधन को पत्र लिखकर देशभर की करीब 10,500 शाखाओं का निष्पक्ष ऑडिट कराने की मांग की है। संगठन ने 30 अक्टूबर को बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO को पत्र भेजा। यूनियन का कहना है कि केवल कर्मचारियों को सस्पेंड करने से ऐसी घटनाओं को रोका नहीं जा सकता। बैंक को यह भी जांचना चाहिए कि आखिर शाखाओं में ऐसी गड़बड़ियां होने की परिस्थितियां क्यों बन रही हैं। इसके लिए प्रत्येक शाखा में कर्मचारियों की संख्या और काम के दबाव का आकलन जरूरी है।
मैनेजर से लेकर बड़े अधिकारियों तक जांच
यूनियन ने बैंक की मौजूदा स्टाफिंग व्यवस्था की समीक्षा करने की भी मांग की है। संगठन के मुताबिक, कई शाखाओं में काम का दबाव अधिक और कर्मचारियों की संख्या कम होने से बैंकिंग सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही यूनियन चाहती है कि जांच केवल ब्रांच मैनेजर या निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि कॉरपोरेट ऑफिस, जोनल और सर्किल ऑफिस की भूमिका भी देखी जाए। कर्मचारियों को बैंकिंग सिस्टम, कैश मैनेजमेंट और फ्रॉड रोकने से जुड़ी पर्याप्त ट्रेनिंग मिली थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि दोष साबित होने पर सख्त कार्रवाई हो, लेकिन पूरी जांच के बिना जल्दबाजी में किसी को जिम्मेदार ठहराना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।