PNC Infratech : लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक को बड़ा झटका लगा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कंपनी पर 3 साल का प्रतिबंध लगा दिया है। इस कार्रवाई के बाद कंपनी अगले तीन वर्षों तक NHAI की नई परियोजनाओं के लिए बोली नहीं लगा सकेगी। यह कार्रवाई एक्सप्रेसवे में सामने आई निर्माण संबंधी खामियों के बाद की गई है।
सड़क धंसने के बाद बढ़ी मुश्किलें
रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने के कुछ ही सप्ताह बाद सड़क के कुछ हिस्सों में धंसाव और खराबी देखने को मिली थी। जांच के दौरान सामने आया कि समस्या केवल सतही नहीं थी। विशेषज्ञों ने प्रभावित हिस्सों के पुनर्निर्माण की सिफारिश की, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लिया गया।
IIT की जांच में क्या निकला?
जानकारी के अनुसार IIT-खड़गपुर के एक प्रोफेसर द्वारा की गई तकनीकी जांच में डिजाइन संबंधी कमियां सामने आईं। रिपोर्ट में कहा गया कि केवल पैचवर्क से समस्या का समाधान संभव नहीं है और प्रभावित हिस्सों को दोबारा बनाना पड़ेगा। इसी के बाद NHAI ने कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया।
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शेयर बाजार में मचा हड़कंप
NHAI की कार्रवाई का असर सीधे कंपनी के शेयरों पर दिखाई दिया। एक दिन में शेयर करीब 20 फीसदी तक टूट गया। अगले कारोबारी सत्र में भी गिरावट जारी रही और शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर 116.25 रुपये तक पहुंच गया। गौरतलब है कि पिछले वर्ष कंपनी का शेयर 325.15 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा था।
मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर क्या होगा असर?
कंपनी ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में कहा है कि प्रतिबंध का असर उसके वर्तमान प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा। साथ ही कंपनी इस आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत बनाई गई थी, जिसमें निर्माण के साथ रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी की होती है।
टोल बंद, रोजाना देना पड़ सकता है मुआवजा
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली रोक दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार जब तक कॉरिडोर पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक कंपनी को NHAI को टोल नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है। अनुमान है कि यह राशि करीब 42 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। इससे कंपनी पर वित्तीय दबाव और बढ़ने की संभावना है।