PNG Drive 3.0 : देश में रसोई गैस व्यवस्था को बदलने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने PNG Drive 3.0 की शुरुआत कर दी है, जिसका लक्ष्य हर दिन 20 हजार नए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन जोड़ना है। इस अभियान के जरिए एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम करने और घरों तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाने की योजना को तेज किया जाएगा। सरकार का फोकस अब ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं को पीएनजी नेटवर्क से जोड़ने पर है।
PNG Drive 3.0 का मकसद क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू और व्यावसायिक उपयोग में एलपीजी की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से लोगों को लगातार गैस आपूर्ति मिलेगी और सिलेंडर आधारित व्यवस्था पर दबाव भी कम होगा। इसी लक्ष्य के साथ देशभर में नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
किन क्षेत्रों में बढ़ाया जाएगा नेटवर्क?
पीएनजी ड्राइव 3.0 के तहत PNGRB ने 80 नए भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान की है। इन इलाकों में गैस पाइपलाइन ढांचे का विस्तार किया जाएगा, जिससे अधिक घरों और व्यवसायों तक पाइप गैस पहुंच सके। रिपोर्ट के मुताबिक पहले से प्रतिदिन 10 हजार से अधिक कनेक्शन और कन्वर्जन किए जा रहे हैं, जिसे अब बढ़ाकर 20 हजार प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
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उपभोक्ताओं के लिए क्या होगी नई सुविधा?
योजना के साथ एक नया ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा। इस पोर्टल के जरिए उपभोक्ता एक ही जगह पर पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे, अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और सेवाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को अधिक आसान और डिजिटल बनाना है।
PNG कनेक्शन क्यों हो रहा लोकप्रिय?
पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद उपभोक्ताओं को हर महीने गैस सिलेंडर बुक कराने की जरूरत नहीं पड़ती। पाइपलाइन के जरिए 24 घंटे गैस आपूर्ति मिलती रहती है। इसके अलावा रसोई में सिलेंडर रखने की आवश्यकता भी समाप्त हो जाती है, जिससे जगह की बचत होती है और सुविधा बढ़ती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
सरकार लंबे समय से स्वच्छ और सुविधाजनक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। PNG Drive 3.0 उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि तय लक्ष्य के अनुसार हर दिन 20 हजार नए कनेक्शन जुड़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में देश के लाखों घर पाइप गैस नेटवर्क से जुड़ सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं को सुविधा मिलने के साथ-साथ ऊर्जा वितरण व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।