पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में बीते कई सप्ताह से जारी आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा सरकार को दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने के साथ ही रावलकोट में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हो गए हैं। खराब मौसम और भारी बारिश के बावजूद आंदोलनकारियों का जोश कम नहीं हुआ है। अब सबकी नजर इस्लामाबाद सरकार के अगले कदम और क्षेत्र की बदलती स्थिति पर टिकी है।
रावलकोट में जुटी बड़ी भीड़, मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी
JAAC के आह्वान पर रावलकोट में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए हैं। आंदोलनकारियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मुजफ्फराबाद की ओर मार्च किया जाएगा। लगातार बारिश और खराब मौसम के बावजूद लोग प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जून से जारी है आंदोलन, कई बार हुई हिंसक झड़पें
5 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन समय के साथ और व्यापक होता गया। शुरुआत में विरोध महंगाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर था, लेकिन बाद में इसमें राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक सुधार और स्थानीय अधिकारों की मांग भी शामिल हो गई। आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। इन घटनाओं में 30 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल बताए गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने मांगी निष्पक्ष जांच
क्षेत्र में बढ़ती हिंसा को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और त्वरित जांच कराने की अपील की है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने का आग्रह किया है। इससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?
आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रही है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में स्थानीय विधानसभा की आरक्षित सीटों की व्यवस्था समाप्त करना, स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना, गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई तथा बिजली, महंगाई और अन्य आर्थिक मुद्दों पर सुधार शामिल हैं।
सुरक्षा बढ़ी, अब सरकार के फैसले पर निगाहें
बढ़ते आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है। विभिन्न स्थानों पर पुलिस, रेंजर्स और अन्य सुरक्षा एजेंसियां निगरानी कर रही हैं। आंदोलन के अगले चरण को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई पहल करती है या फिर टकराव और बढ़ता है।