आरोपी पारस सोम जेल जा चुका और रूबी भी आशा ज्योति केंद्र से अपनों के बीच पहुंच चुकी है, लेकिन पुलिस अभी कपसाड प्रकरण में कानून व्यवस्था को लेकर समझौता करती नजर नहीं आ रही है, क्योंकि विपक्षी दल के नेता लगातार गांव घुसने का प्रयास कर रहे है। इसलिए कपसाड गांव जाने वाले 14 प्वाइंटों पर नाकाबंदी कर पुलिस का पहरा लगाया गया है और आधार कार्ड देखकर ग्रामीणों को गांव में एंट्री दी जा रही है। पुलिस के कड़े पहरे के कारण गांव में सब्जी बेचने वालों के ना आने के कारण ग्रामीण आलू और साग के साथ रोटी खा रहे हैं।
यह था मामला
सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड गांव में आठ जनवरी की सुबह दलित महिला सुनीता की हत्या करने के बाद गांव का युवक पारस सोम उनकी बेटी रूबी को अगवा कर ले गया था। इस घटना के बाद राजनीति गरमा गई थी। रूबी की सकुशल बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दस विशेष टीमें लगाई गई थी। कपसाड गांव के बिगड़े हालातों को देखते नौ जनवरी को पुलिस ने पूरे गांव की नाकाबंदी कर पुलिस का पहरा लगा दिया था, ताकि गांव के माहौल को ग्रहण न लग सके। शनिवार शाम को पुलिस ने आरोपी पारस को गिरफ्तार कर रूबी को सकुशल बरामद कर लिया। रविवार को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था, यहां से आरोपी पारस को न्यायिक हिरासत में 14 दिन के लिए जेल भेज दिया और रूबी को आशा ज्योति केंद्र में रखा गया था। काउंसलिंग के बाद सोमवार देर शाम रूबी आशा ज्योति केंद्र से अपना के बीच कपसाड गांव चली गई।
पांचवें दिन पर पुलिस के पहरे में जी रहे कपसाड के लोग
आरोपी पारस के जेल जाने और रूबी के घर लौटने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि गांव से पुलिस का पहरा हट जाएगा, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने गांव आने जाने वाले 14 प्वाइंटों पर नाकाबंदी कर पुलिस का पहरा लगा रखा है। गांव में आने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए अधिकारियों के साथ प्रधान है। प्रधान के पहचानने और आधार कार्ड देखने के बाद ही ग्रामीणों को गांव में एंट्री मिल रही है। अगर आधार कार्ड में कपसाड की जगह किसी दूसरे गांव का नाम लिखा होता तो उसे गांव में जाने नहीं दिया जाता। अधिकारियों का कहना है कि गांव में बाहरी लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध है, लेकिन किसी को परेशान नहीं किया जा रहा है। हालांकि ग्रामीण खुलकर नहीं बोल रहे है पर उनका कहना है कि खेतों पर जाने दिया जा रहा है,लेकिन गांव की गलियों में घूमने पर प्रतिबंध है। बाहर निकलते ही पुलिस टोक देती हैं। गांव में चुनावों में भी इतनी फोर्स नहीं देखी। चारों दिनों से गांव में पुलिस की नाकाबंदी के कारण सब्जी की फेरी लगाने वाले भी नहीं आ रहे है। आलू और साग के साथ रोटी खा रहे हैं। बच्चे फल खाने को भी तरस गए हैं। गांव के स्कूल में भी वही बच्चे जा रहे हैं, जिनकी परीक्षा चल रही है। बच्चों को खुद टीचर स्कूल से उनके घरों तक छोड़कर आ रही हैं। इसके अलावा गांव की सारी गतिविधि बंद हैं, क्योंकि पता नहीं कहां से क्या हो जाए। उधर, मंगलवार को भी एसपी देहात अभिजीत कुमार ने पुलिस फोर्स के साथ कपसाड गांव की सुरक्षा व्यवस्था को परखा और गांव में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देश दिए। पिछले पांच दिनों से एसपी देहात के अलावा एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी सरधना क्षेत्र के हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।
रूबी के घर की सीसीटीवी कैमरों से हो रही है निगरानी
पुलिस अधिकारी इस मामले में जरा भी रिस्क लेना नहीं चाह रहे है, क्योंकि मामला दलित और ठाकुरों के बीच का है। कपसाड गांव की आधी से ज्यादा आबादी ठाकुरों की, बाकि में अन्य जाति हैं। इसलिए पुलिस अधिकारी पूरे प्रकरण में कदम फूंक-फूंक कर चल रहे है। इसलिए पुलिस ने रूबी के घर पहुंचने के बाद निगरानी के लिए चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। ताकि किसी भी तरह की गतिविधि होने पर पुलिस को तत्काल जानकारी मिल सके। इसी के मद्देनजर गांव की हर गली पर और मोड पर पुलिस का पहरा लगाया गया है।