Political battle on Ambedkar Jayanti: अंबेडकर जयंती पर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी तीनों ही दल बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को साधने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बसपा का शक्ति प्रदर्शन
मायावती के नेतृत्व में बसपा लखनऊ के अंबेडकर पार्क में विशाल कार्यक्रम कर रही है। पार्टी अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक, खासकर जाटव समुदाय, को फिर से मजबूत करने के लिए इसे अहम अवसर मान रही है। संगठन स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं।
सपा का PDA फोकस
वहीं अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा गांव-गांव तक कार्यक्रम कर रही है। पार्टी का फोकस PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण पर है। संविधान और सामाजिक न्याय के मुद्दों को बूथ स्तर तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई जा रही है।
यह भी देखेंःनारी शक्ति को समर्पित होगा बड़ा फैसला, संसद रचने जा रही नया इतिहास
सामाजिक समरसता अभियान
योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस मौके को राज्यव्यापी अभियान का रूप दिया है। मूर्ति सौंदर्यीकरण, ‘युवा संवाद संगम’ और दलित बस्तियों तक पहुंच बनाकर बीजेपी सामाजिक समरसता का संदेश देने की कोशिश कर रही है।
क्यों अहम हैं बाबा साहेब
डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत अब किसी एक दल तक सीमित नहीं रही। उत्तर प्रदेश में करीब 21% दलित मतदाता हैं, जो चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि सभी दल बाबा साहेब के विचारों और विरासत को अपने पक्ष में जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।