Womens Reservation: लोकसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार से पुराने महिला आरक्षण विधेयक को फिर से पेश करने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले इस बिल को सभी दलों का समर्थन मिला था, इसलिए इसे दोबारा लाकर सरकार अपनी नीयत स्पष्ट करे। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
पुराना विधेयक लाने की चुनौती
प्रियंका गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार को तुरंत संसद बुलाकर पुराने महिला आरक्षण बिल को पेश करना चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि इससे यह साफ हो जाएगा कि कौन महिला हितों के पक्ष में है और कौन नहीं। उनका दावा है कि विपक्ष इस विधेयक का पूरा समर्थन करेगा और इसे पारित कराने में कोई बाधा नहीं बनेगा।
विपक्ष की रणनीति और पत्र की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, ‘इंडिया’ गठबंधन इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखने की तैयारी में है। गठबंधन की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही थी।
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सरकार की मंशा पर सवाल
प्रियंका गांधी ने इससे पहले भी सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की, जो सफल नहीं हो पाई।
वोटिंग में क्यों गिरा विधेयक
लोकसभा में इस बिल पर लंबी बहस के बाद वोटिंग हुई, जिसमें 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। इस तरह बिल आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। इसके बाद से ही महिला आरक्षण का मुद्दा देश की राजनीति में केंद्र में आ गया है।