Political turmoil in Maharashtra: महाराष्ट्र की कल्याण डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में चुनावी नतीजों के बाद सियासत दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने से जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। इसी बीच चर्चा है कि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच नया समीकरण बन सकता है, जिससे उद्धव ठाकरे गुट और बीजेपी को झटका लगने की संभावना जताई जा रही है।
शिंदे सेना–MNS गठबंधन की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट और MNS के बीच मेयर पद को लेकर बातचीत चल रही है। माना जा रहा है कि दोनों दल मिलकर कल्याण डोंबिवली में सत्ता पर काबिज हो सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी भी पार्टी की ओर से गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिर भी सियासी गलियारों में इस संभावित समझौते की चर्चाएं तेज हैं।
एक साथ पहुंचे पार्षद
बुधवार को उस समय राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई, जब MNS के पांच और शिंदे गुट के 53 पार्षद एक ही समय पर कोंकण डिविजनल कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। ग्रुप रजिस्ट्रेशन के लिए दोनों दलों का एक साथ पहुंचना महज संयोग माना जाए या सोची-समझी रणनीति, इस पर बहस छिड़ गई है। इसी घटनाक्रम ने गठबंधन की अटकलों को और मजबूत कर दिया।
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बहुमत का गणित क्या कहता है
कल्याण डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में मेयर बनाने के लिए 62 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। वर्तमान स्थिति में शिंदे गुट के पास 53 और बीजेपी के पास 50 पार्षद हैं। MNS के साथ आने से शिंदे सेना बहुमत के करीब पहुंच सकती है। वहीं, कुछ निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों के समर्थन की भी संभावना जताई जा रही है।
नेताओं की मुलाकात से मिले संकेत
कोंकण डिविजनल कमिश्नर कार्यालय में शिंदे गुट और MNS नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। इस दौरान सांसद श्रीकांत शिंदे ने संकेत दिए कि जो भी विकास के लिए साथ आएगा, उसे साथ लेकर चला जाएगा। इन बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में कल्याण डोंबिवली की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।