Political violence: बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक हिंसा ने देश को हिला दिया है। खुलना शहर में नेशनल सिटिज़न्स पार्टी (एनसीपी) से जुड़े श्रमिक नेता मोहम्मद मोतालिब सिकदार पर दिनदहाड़े गोली चलाई गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब देश पहले से ही छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद तनावपूर्ण हालात से गुजर रहा है। लगातार हो रहे हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था, अंतरिम सरकार और भविष्य की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खुलना हमला, सुरक्षा पर सवाल
खुलना के सोनाडांगा इलाके में अज्ञात हमलावरों ने एनसीपी के वरिष्ठ श्रमिक नेता मोतालिब सिकदार को सिर में गोली मारी। वे पार्टी की आगामी श्रमिक रैली की तैयारियों में जुटे थे। गोली उनके सिर को छूते हुए निकल गई, जिससे उनकी जान बच गई, हालांकि शुरुआत में हालत गंभीर बताई गई। उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब उनकी स्थिति स्थिर है। घटना के बाद इलाके में पुलिस तैनात कर दी गई है और हमलावरों की तलाश जारी है। यह हमला इस महीने किसी युवा राजनीतिक नेता पर दूसरा बड़ा हमला माना जा रहा है।
हादी की हत्या, हसीना का आरोप
इससे पहले छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी की ढाका में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद देशभर में प्रदर्शन भड़क उठे। लोग दोषियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग कर रहे हैं। इस बीच भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के रवैये से न केवल देश में अराजकता बढ़ी है, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंध भी बिगड़े हैं। हसीना ने दावा किया कि लोकतांत्रिक शासन की वापसी के बाद ही हालात सामान्य हो सकते हैं और दोनों देशों के रिश्ते फिर मजबूत होंगे।