सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित करीब 70 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अदालत के आदेश के बाद शनिवार तड़के प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के विरोध में सपा, बसपा और एआईएमआईएम समेत विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को भी सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की बात सामने आई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ध्वस्तीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे सच्चे सनातनी कैसे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा हिंदू कभी किसी दूसरे की आस्था का अपमान नहीं करता। अखिलेश ने कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि कहीं अगली अदालत से राहत मिलने की संभावना के कारण तो जल्दबाजी में कदम नहीं उठाया गया।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि पूरे प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर गिराने का सरकारी अभियान ठीक नहीं है। उन्होंने सरकार से ऐसे कदम रोककर दूसरे समाधान तलाशने की मांग की। मायावती ने कहा कि संवैधानिक सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों का समान सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मस्जिद को सुबह करीब पांच बजे ही क्यों गिराया गया। इसको लेकर प्रशासन की कार्रवाई और उसके समय पर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि प्रशासन की कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में हुई। सिटी मजिस्ट्रेट ने जुलाई में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। चार सितंबर को जिला अदालत ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति का आदेश भी कायम रहा।
ध्वस्तीकरण के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई। सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिस बल तैनात रहा और आसपास निगरानी बढ़ाई गई।