केंद्र सरकार की ओर से अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल करने के फैसले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। सरकार के इस निर्णय को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने देश की सुरक्षा और युवाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार अग्निवीरों की भविष्य से जुड़ी चिंताओं का स्थायी समाधान नहीं है।
इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि अग्निवीरों के समर्पण और काम को देखते हुए सरकार ने उन्हें अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का जोर योजना की मूल व्यवस्था में बदलाव और युवाओं को स्थायी रोजगार देने पर है।
75 प्रतिशत अग्निवीरों को मिलेगा दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका
सरकार के फैसले के तहत जिन अग्निवीरों का चार साल का निर्धारित कार्यकाल पूरा होने वाला था, उन्हें अब दो साल अतिरिक्त सेवा का अवसर देने की बात कही गई है। इससे उनकी कुल सेवा अवधि छह साल हो जाएगी। वहीं, अग्निवीर योजना के मौजूदा प्रावधानों के तहत 25 प्रतिशत युवाओं को उनके प्रदर्शन, योग्यता और निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर नियमित सैन्य सेवा में शामिल करने की व्यवस्था है।
इस बदलाव को अग्निवीरों के लिए अतिरिक्त अनुभव हासिल करने और सेना में अधिक समय तक सेवा देने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस फैसले के बाद यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या अतिरिक्त दो साल की सेवा युवाओं के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता को दूर कर पाएगी।
अल्ताफ ठाकुर ने बताया युवाओं के लिए अच्छी पह
श्रीनगर में भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने अग्निवीर योजना का समर्थन करते हुए कहा कि इसके दो प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला देश की सेवा और दूसरा बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना एक अच्छी पहल है और इसमें शामिल युवाओं ने समर्पण, अनुशासन और पेशेवर क्षमता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं।
अल्ताफ ठाकुर के मुताबिक, अग्निवीरों ने अपनी ड्यूटी और जिम्मेदारियों के दौरान ईमानदारी और कार्यक्षमता का परिचय दिया है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में शामिल करने का प्रावधान है। वहीं, शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को कार्यकाल समाप्त होने से पहले दो साल का अतिरिक्त समय देना सरकार का महत्वपूर्ण फैसला है।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय का सभी को स्वागत करना चाहिए, क्योंकि इससे युवाओं को सेना में अपनी सेवाएं जारी रखने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
कांग्रेस पर साधा निशाना, अग्निवीरों के प्रदर्शन का दिया हवाला
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने शुरुआत में अग्निवीर योजना का कड़ा विरोध किया था। लेकिन योजना के तहत भर्ती हुए युवाओं ने अपनी ड्यूटी और पेशेवर क्षमता के जरिए खुद को साबित किया है।
उन्होंने कहा कि अग्निवीरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी और समर्पण दिखाया है। ऐसे में उनकी सेवा अवधि बढ़ाने का फैसला उनके काम को महत्व देने वाला कदम है।
मोहन सिंह बिष्ट बोले- अग्निवीरों के लिए आगे भी आएंगी योजनाएं
दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष और भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने भी केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना के तहत पहले युवाओं को चार साल तक सेवा का मौका मिलता था, लेकिन अब इसे दो साल और बढ़ा दिया गया है।
मोहन सिंह बिष्ट ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सरकार अग्निवीरों के लिए और भी योजनाएं तैयार करेगी। उनके मुताबिक, सेवा अवधि बढ़ने से युवाओं को अतिरिक्त समय और अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा।
वहीं, दिल्ली के भाजपा विधायक रविकांत उज्जैनवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार अपने काम और विकसित भारत के संकल्प को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के हित में लगातार फैसले लेती रहेगी।
कांग्रेस और RJD ने उठाए सवाल
दूसरी तरफ, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार के फैसले को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अग्निवीरों की सेवा अवधि में दो साल की बढ़ोतरी से उनकी सबसे बड़ी चिंता यानी स्थायी रोजगार और भविष्य की सुरक्षा का समाधान नहीं होगा।
विपक्ष का तर्क है कि चार या छह साल की सेवा के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को सेना से बाहर होना पड़ेगा। ऐसे में सरकार को अग्निवीर योजना की समीक्षा कर युवाओं के लिए स्थायी भर्ती और रोजगार के अधिक अवसर सुनिश्चित करने चाहिए।
कुल मिलाकर, अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने का फैसला अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। भाजपा इसे युवाओं के हित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बता रही है, जबकि कांग्रेस और राजद इसे अधूरा कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।