UP News: यूपी के प्रमुख महानगरों में वायु प्रदूषण ने खतरनाक रूप धारण कर लिया है। घने कोहरे और जहरीली हवा के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में एक्यूआई बार-बार गंभीर से खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। पीएम 2.5 और पीएम10 के स्तर मानक से कई गुना अधिक हैं, जो फेफड़ों, हृदय और बच्चों की सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं।
प्रदूषित शहरों में शीर्ष पर गाजियाबाद
ताजा रिपोर्ट के अनुसार (फरवरी 2026 की शुरुआत में) गाजियाबाद कई दिनों से देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शीर्ष पर बना हुआ है। यहां एक्यूआई 300 से 486 तक दर्ज किया गया, जिसमें पीएम 2.5 का स्तर 200-300 यूजी/एम घनमीटर के बीच पहुंचा। आईक्यू एयर और एक्यूआई डॉट इन की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग में गाजियाबाद, सेक्टर (नोएडा), लोनी और ग्रेटर नोएडा लगातार टॉप प्रदूषित स्थानों में शामिल रहे।
लखनऊ में प्रदूषण खतरनाक श्रेणी में दर्ज
लखनऊ में एक्यूआई 239 से 323 के बीच 'खतरनाक' श्रेणी में दर्ज हुआ, जहां पीएम 2.5 170-189 यूजी/एम घन मीटर तक पहुंचा। कानपुर में भी एक्यूआई 145 से ऊपर 'अनहेल्दी' से 'सेवियर' स्तर पर रहा, जबकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 300-400 के पार एक्यूआई ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया।
जनवरी में टूटा पांच सालों का रिकार्ड
इसके अलावा जनवरी 2026 में कई इलाकों में एक्यूआई 800+ तक पहुंचने की खबरें आई थीं, जो 5 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं।प्रदूषण के मुख्य कारणों में वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य, पराली जलाना और सर्दियों में कम हवा की गति शामिल हैं। घना कोहरा प्रदूषित कणों को जमीन के करीब रोक रहा है, जिससे स्मॉग की स्थिति बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर एक्यूआईआंकड़े भ्रामक
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और कुछ निजी ऐप्स पर फैलाए जा रहे एक्यूआई आंकड़े भ्रामक हैं। वे यूएस-ईपीए स्टैंडर्ड पर आधारित होते हैं, जबकि भारत एकक्यूआई फ्रेमवर्क का पालन करता है। अधिकारियों का कहना है कि सीपीसीबी के आधिकारिक 24-घंटे औसत डेटा पर भरोसा किया जाए।
पश्चिमी यूपी के जिलों से सात विभागों से रिपोर्ट तलब
योगी सरकार ने पश्चिमी यूपी (एनसीआर से सटे जिलों) में प्रदूषण रोकने के लिए सात विभागों से रिपोर्ट तलब की है और वार्षिक कार्ययोजना मांगी है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि 2026 में सुधारात्मक कदम तेज किए जाएं, जिसमें सख्त मॉनिटरिंग और ग्रैप जैसे नियमों का पालन शामिल है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से सांस की बीमारियां, अस्थमा और हृदय रोग बढ़ सकते हैं। लोगों से अपील है कि मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें और बाहरी गतिविधियां सीमित रखें।