Poster War Against Akhilesh Yadav In UP: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर लखनऊ समेत कई जिलों में ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिन्होंने नई बहस छेड़ दी है। इन पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें भी नजर आ रही हैं। पोस्टरों में परिवारवाद से लेकर माफिया से रिश्तों तक के आरोप लगाए गए हैं। आखिर इन पोस्टरों में ऐसा क्या है, जिसने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
लखनऊ के चौराहे पर लगे पोस्टर ने खींचा ध्यान
लखनऊ में नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे के पास अखिलेश यादव के खिलाफ एक बड़ा पोस्टर लगाया गया है। इसमें अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। पोस्टर में तंज भरे अंदाज में लिखा गया है, 'चाय, समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई।' इस नारे के जरिए समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की गई है।
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यूपी के 15 जिलों में दिखे पोस्टर
यह मामला सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है। खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के करीब 15 जिलों में ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर जैसे जिले शामिल हैं। अलग-अलग जगहों पर लगे इन पोस्टरों में समाजवादी पार्टी की राजनीति और उसके पुराने कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस तरह पोस्टरों के जरिए चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
परिवारवाद को लेकर भी साधा गया निशाना
पोस्टरों में केवल माफिया से संबंधों के आरोप ही नहीं लगाए गए, बल्कि परिवारवाद का मुद्दा भी उठाया गया है। एक पोस्टर में पार्टी को परिवार तक सीमित बताने वाला नारा लिखा गया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी की पुरानी सरकार के दौरान हुई कुछ घटनाओं और फैसलों का भी जिक्र किया गया है। इन नारों के जरिए पार्टी की छवि पर सवाल खड़े करने की कोशिश की गई है। हालांकि, पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को अपने आप में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
आजम खान से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा
अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात के बाद यह पोस्टर मामला और चर्चा में आ गया है। आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में इस मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। दूसरी तरफ, पोस्टरों के जरिए अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश हो रही है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने के संकेत भी मिल रहे हैं।
चुनाव से पहले पोस्टर की राजनीति हुई तेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पोस्टर के जरिए विरोधियों पर निशाना साधने का चलन नया नहीं है। अलग-अलग दल समय-समय पर पोस्टर और नारों के जरिए अपनी बात रखते रहे हैं। इस बार अखिलेश यादव के खिलाफ लगे पोस्टर भी इसी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले पर आगे क्या प्रतिक्रिया देती है और चुनाव से पहले यह मुद्दा कितना बड़ा रूप लेता है। फिलहाल, इन पोस्टरों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
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