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I Love Muhammad vs I Love Mahadev: उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुआ धार्मिक नारेबाजी का विवाद अब कई राज्यों तक फैल चुका है। 4 सितंबर को बारावफात के जुलूस के दौरान लगाए गए “I Love Muhammad” बोर्ड पर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद तनाव बढ़ गया। पुलिस ने हालात संभालने के लिए बोर्ड हटाया, लेकिन मामला सोशल मीडिया पर पहुंचते ही तूल पकड़ गया। धीरे-धीरे हिंदू संगठनों ने ‘I Love Mahadev’, ‘I Love Ram’ जैसे अभियानों की शुरुआत कर दी। वहीं मुस्लिम संगठनों ने अपने जुलूसों और सभाओं में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर और नारे जारी रखे।
सोशल मीडिया पर बढ़ी तकरार
कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद अब उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तराखंड तक फैल गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #ILoveMahadev और #ILoveRam जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय #ILoveMuhammad के साथ अभियान चला रहा है। दोनों तरफ से हजारों यूजर्स अपनी आस्था और धार्मिक प्रतीकों के प्रति प्रेम प्रकट कर रहे हैं। कई जगह विरोध प्रदर्शन, एफआईआर और गिरफ्तारियों तक स्थिति पहुंच गई है। पुलिस अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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नेताओं और संगठनों के बयान
हिंदू संगठनों ने इसे “सनातन एकता” का अभियान बताया है। काशी के संत नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह प्रतिक्रिया समुदाय विशेष द्वारा समाज को अस्थिर करने की कोशिश का जवाब है। उन्होंने ‘I Love Mahadev’ अभियान को काशी से शुरू कर देशभर में फैलाने की बात कही। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ‘I Love Muhammad’ का समर्थन करते हुए कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है और अपराध नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने चेतावनी दी कि समाज को अस्थिर करने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।