दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रदर्शन को अपना समर्थन देने के साथ ही आरोप लगाया कि आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठनों ने दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदायों के नेताओं को इससे दूर रखा है। आंबेडकर ने सवाल किया कि मायावती, एमके स्टालिन, बीआरएस और अन्य नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित क्यों नहीं किया गया।
आयोजकों की भूमिका पर सवाल उठाए
प्रकाश आंबेडकर ने 9 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने वीडियो संदेश में यह बात कही। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनकी पार्टी 10 अक्टूबर के प्रदर्शन का समर्थन करती है। हालांकि, उन्होंने आंदोलन के आयोजकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
CJP और कांग्रेस पर क्या लगाया आरोप?
प्रकाश आंबेडकर के मुताबिक, सरकार जिस तरह प्रदर्शन को रोकने की कोशिश कर रही है, उसी तरह आंदोलन का नेतृत्व करने वाले CJP और कांग्रेस पर भी कुछ वर्गों को इससे दूर रखने का आरोप है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की लड़ाई में दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदायों के नेतृत्व की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने अपने संदेश में सवाल उठाया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, बीआरएस, बसपा प्रमुख मायावती और अन्य नेताओं को प्रदर्शन के लिए आमंत्रित क्यों नहीं किया गया। आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आंदोलन के समर्थन में है, लेकिन विरोध-प्रदर्शन में सभी सामाजिक वर्गों और राजनीतिक नेतृत्व की भागीदारी होनी चाहिए।
सरकार पर भी साधा निशाना
VBA प्रमुख ने केंद्र सरकार पर प्रदर्शन को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली जाने वाले लोगों को रोका जा रहा है, ट्रेनों को रद्द किया गया है और वाहनों की जांच की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार से जोड़ते हुए सरकार से संयम बरतने की मांग की।
आंबेडकर ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आशंका पैदा की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा या लाठीचार्ज जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा है। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।