बिहार की राजनीति में एक बड़ा संदेश देते हुए जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने पटना स्थित अपना आवास छोड़ने का फैसला किया है। अब वह आईआईटी-पटना के पास बने बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहकर संगठन को मजबूत करने की तैयारी करेंगे। उनका कहना है कि आने वाले पांच वर्षों तक वह पूरी तरह जन सुराज के विस्तार और बिहार की राजनीति में बदलाव के मिशन पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
आश्रम बनेगा नया राजनीतिक केंद्र
जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि उन्होंने पटना का अपना पुराना ठिकाना छोड़ दिया है और अब बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहेंगे। यह आश्रम आईआईटी-पटना के नजदीक स्थित है। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों तक यही स्थान उनका निवास और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहेगा। इस फैसले को बिहार की राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनावी हार के बाद नई रणनीति
बिहार विधानसभा चुनाव 2026 में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद प्रशांत किशोर अब संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी में जुट गए हैं। उनका मानना है कि जन सुराज को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए नेताओं को जनता के बीच रहना होगा। इसी सोच के तहत उन्होंने आश्रम में रहने का निर्णय लिया है ताकि वह सीधे लोगों से संवाद कर सकें और पार्टी को नई दिशा दे सकें।
नीतीश कुमार पर फिर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति और पलायन के मुद्दे पर राज्य के वरिष्ठ नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद बिहार से माइग्रेशन की समस्या खत्म नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं ने जनता की मूल समस्याओं को नजरअंदाज किया और राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी। साथ ही उन्होंने युवाओं और महिलाओं से भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की।
महिलाओं और युवाओं को दिया संदेश
जन सुराज प्रमुख ने कहा कि बिहार की महिलाओं और युवाओं को चुनाव के दौरान किसी लालच या भावनात्मक राजनीति से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वोट का इस्तेमाल अपने परिवार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर करना जरूरी है। प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बिहार में बदलाव तभी संभव है जब जनता जाति और धर्म से ऊपर उठकर विकास को प्राथमिकता देगी।
2031 तक बड़ा असर बनाने की तैयारी
प्रशांत किशोर ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में जन सुराज बिहार की राजनीति में मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा। उनका कहना है कि पार्टी का लक्ष्य सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि राज्य में सकारात्मक बदलाव लाना है। आश्रम में रहने का उनका फैसला इसी लंबी राजनीतिक और सामाजिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।