Prashant Kishor Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में एक नई हलचल मच गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने गुरुवार को अपनी पार्टी की पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है। इसमें 51 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। भले ही प्रशांत किशोर प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके राजनीतिक अभियान की गूंज पूरे बिहार में सुनाई दे रही है। जन सुराज ने घोषणा की है कि किशोर 11 अक्टूबर से तेजस्वी यादव के गढ़ राघोपुर से अपने प्रचार का आगाज़ करेंगे, जिसे राजनीतिक रूप से एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
जन सुराज की पहली लिस्ट, 51 प्रत्याशियों के नाम
जन सुराज पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती और राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू सिंह ने 51 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। बताया गया कि यह लिस्ट पार्टी की “जमीनी सर्वे रिपोर्ट” और “लोकमत के आधार” पर तैयार की गई है। पार्टी का दावा है कि ये उम्मीदवार समाज के हर वर्ग से चुने गए हैं — किसान, शिक्षक, नौजवान और महिलाएं, ताकि “जन सुराज” का मतलब केवल नारा नहीं बल्कि जनभागीदारी का मॉडल बने।राघोपुर से शंखनाद, तेजस्वी को सीधी चुनौती
जन सुराज ने ऐलान किया है कि प्रशांत किशोर 11 अक्टूबर को राघोपुर से अपना चुनावी अभियान शुरू करेंगे। राघोपुर वही सीट है, जहां से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव विधानसभा सदस्य हैं। ऐसे में किशोर का वहां से प्रचार की शुरुआत करना साफ संकेत देता है कि उनकी नजर बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी पर है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह कदम जन सुराज को सुर्खियों में लाने की रणनीतिक चाल है।
चुनावी कार्यक्रम तय, नामांकन की उलटी गिनती
बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को। पहले चरण की सीटों की संख्या 121 है, जबकि दूसरे में 122 सीटों पर मतदान होगा।
पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर,
जांच 18 अक्टूबर को और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर तय की गई है।
दूसरे चरण के लिए यह क्रम 20, 21 और 23 अक्टूबर रहेगा। चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।
243 सीटों में से 40 आरक्षित
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं। इनमें से 38 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 2 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, ऐसे में राज्य का सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
जन सुराज की चुनौती — बदलाव बनाम परंपरा
प्रशांत किशोर लंबे समय से "जन सुराज पदयात्रा" के जरिए जनता से सीधा संवाद कर रहे थे। अब पार्टी ने इस संवाद को चुनावी जंग में बदल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज का यह कदम बदलाव बनाम परंपरा की लड़ाई को जन्म देगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का समीकरण बदल पाएंगे या नहीं।