प्रयागराज (फूलपुर) की एक 15 साल की दलित लड़की को मई में गुमराह कर केरल ले जाया गया, जहां उसे एक बंद कमरे में रखा गया. उर्दू और इस्लामी रीति-रिवाजों की शिक्षा देने के साथ ही कथित रूप से इस्लाम में धर्मांतरण के लिए कार्यशाला में शामिल किया गया. पुलिस और ATS की शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि उसके बाद उसे “खद्दामा वीजा” पर सऊदी अरब भेजने की योजना बनाई जा रही थी. पूछताछ के दौरान लड़की ने बताया कि उसे विदेश भेजने से पहले बंद कमरे में रखकर इस्लामिक प्रशिक्षण दिया गया. जिसमें उर्दू सिखाना और जिहाद से जुड़ी बातें शामिल थीं. केरल के ट्रेनिंग सेंटर से भागकर जब वह प्रयागराज लौट आई, तब जांच एजेंसियां न केवल धर्मांतरण बल्कि सऊदी भेजने की इस योजना की गहराई से जांच कर रही हैं.
क्या है पूरा मामला?
15 साल की दलित लड़की को मई के दूसरे सप्ताह में कथित रूप से अगवा कर उसे केरल ले जाने का मामला अब अधिक चिंताजनक रूप ले चुका है. पुलिस और ATS की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि उसे उर्दू और इस्लामिक रीति–रिवाजों की ट्रेनिंग के लिए बंद कमरे में रखा गया, जिससे साफ़ संकेत मिलते हैं कि उसका धर्मांतरण कराया जा रहा था. उस पर यह भी आरोप है कि उसको सऊदी अरब भेजने की योजना बनाई जा रही थी. जिसके बारे में उसे ‘खद्दामा वीजा’ (गृहकार्य वीजा) पर विदेश भेजे जाने की बात कही गई.
ट्रेनिंग सेंटर में थीं और भी लडकियां
केरल में उस ट्रेनिंग सेंटर में लड़की को 18–20 अन्य लड़कियों के साथ रखा गया था, जहां से वह भागने में सफल रही और थ्रिस्सुर रेलवे स्टेशन पर पहुँचकर स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी और बहादुरी से वह सुरक्षित लौट सकी. अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जिहाद संबंधी ट्रेनिंग और विदेश भेजने की योजना की तह तक जा रही है. जिससे यह मामला केवल धर्मांतरण तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संभावित अपराधिक आतंकी कनेक्शन की शक्ल भी ले रहा है.