Pre-Independence Indian Sports : आज भारत खेलों की दुनिया में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन इसकी मजबूत नींव आजादी से पहले ही रखी जा चुकी थी। 15 अगस्त 1947 से पहले भी कई भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान खींचा और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया। इन खिलाड़ियों ने ऐसे दौर में सफलता हासिल की, जब संसाधन सीमित थे और देश ब्रिटिश शासन के अधीन था।
नॉर्मन प्रिचार्ड का ऐतिहासिक कारनामा
भारत के लिए ओलंपिक में पहला पदक जीतने का श्रेय नॉर्मन प्रिचार्ड को दिया जाता है। कोलकाता में जन्मे प्रिचार्ड ने 1900 पेरिस ओलंपिक में 200 मीटर दौड़ और 200 मीटर हर्डल्स में रजत पदक जीते थे। वह भारत की ओर से ओलंपिक में भाग लेने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल रहे। उनके पदकों ने दुनिया के सामने भारत की खेल क्षमता का पहला बड़ा परिचय कराया।
ध्यान चंद का जादू
भारतीय हॉकी की बात हो और मेजर ध्यान चंद का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है। उनकी स्टिक का जादू पूरी दुनिया ने देखा। उन्होंने 1928, 1932 और 1936 ओलंपिक में भारत को लगातार तीन स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 1936 बर्लिन ओलंपिक में उनकी कप्तानी में भारत ने जर्मनी को हराकर स्वर्ण पदक जीता। ध्यान चंद आज भी भारतीय खेल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।
क्रिकेट को नई पहचान
भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में कर्नल सीके नायडू का बड़ा योगदान रहा। वह भारत के पहले टेस्ट कप्तान बने और 1932 में लॉर्ड्स मैदान पर भारत का नेतृत्व किया। उस समय भारतीय क्रिकेट अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था और नायडू ने अपनी बल्लेबाजी व नेतृत्व से टीम को नई दिशा दी। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके आंकड़े भी बेहद शानदार रहे।
लाला अमरनाथ की ऐतिहासिक पारी
भारतीय क्रिकेट के पहले बड़े ऑलराउंडरों में लाला अमरनाथ का नाम शामिल है। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाकर इतिहास रचा था। वह टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। बाद में आजाद भारत के पहले कप्तान बनने का गौरव भी उन्हें ही मिला। उनकी उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट की मजबूत नींव मानी जाती हैं।
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रूप सिंह ने भी छोड़ी अमिट छाप
मेजर ध्यान चंद के छोटे भाई कैप्टन रूप सिंह भी भारतीय हॉकी के बड़े सितारे थे। 1932 और 1936 ओलंपिक में उन्होंने भारत की स्वर्णिम सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1932 ओलंपिक में अमेरिका के खिलाफ एक मुकाबले में उन्होंने अकेले 10 गोल दागे थे, जो आज भी ओलंपिक इतिहास का एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है। इन महान खिलाड़ियों ने आजादी से पहले ही भारत को खेलों की दुनिया में पहचान दिलाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गए।