मध्य प्रदेश के सीधी जिले की चुरहट विधानसभा क्षेत्र में गैहाल रोड की हालत देखकर गर्भावस्था के नौवें महीने में यूट्यूबर लीला साहू ने सारे गिले-शिकवे जनता के सामने रख दिए. वीडियो में वह सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से तीखा सवाल पूछती हैं कि “जब आपको सड़क बनवाने की हिम्मत नहीं थी, तो झूठा वादा क्यों किया?” साथ ही उन्होंने नितिन गडकरी और प्रधानमंत्री मोदी तक से मदद की मांग की है, यह कहते हुए कि अगर सड़क की हालत में कोई परेशानी हुई तो इसके जिम्मेदार सांसद और प्रशासन होंगे. इस वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव भी तेज़ हो गया है.
चुरहट-खड्डी से गजरी तक जर्जर सड़क
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित चुरहट विधानसभा क्षेत्र की लगभग 10 किमी सड़क बारिश के दौरान कीचड़ और गड्ढों से भरी रहती है, जिससे स्थानीय लोग विशेषकर दोपहिया वाहन चालको को गाड़ी चलाने, बीमार और गर्भवती महिलाओ को अस्पताल जाना भी मुश्किल बना हुआ है. हर बार बरसात होते ही इलाके का हाल बुरा हो जाता है. वाहन फंस जाते हैं, एम्बुलेंस भी मरीज ले जाने में असमर्थ होती है और रास्ता पार करने में जोखिम बना रहता है. स्थानीय निवासी यूट्यूबर लीला साहू इसी समस्या को लगभग एक साल से लगातार उठा रही थीं.
गर्भवती लीला का सीधे सांसद से सवाल
हाल ही में वायरल हुए वीडियो में लीला साहू, जो नौवें महीने की गर्भवती हैं, सड़क पर खड़ी होकर सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से तीखा सवाल पूछती हैं कि “सांसद जी, जब आपको सड़क बनवाने की हिम्मत नहीं थी, तो झूठा वादा क्यों किया? अगर बता देते कि बन नहीं पाएगी, तो मैं नितिन गडकरी जी या प्रधानमंत्री मोदी से मांग करती.”
इस दौरान उन्होंने जिला कलेक्टर, केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी और प्रधानमंत्री मोदी तक को शामिल किया, यह चेतावनी देते हुए कि कहीं उनके साथ सड़क की खराब हालत के चलते कुछ हो गया तो वो इसके जिम्मेदार होंगे.
सांसद को लिया निशाने पर
वीडियो के वायरल होने के बाद सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने आश्वासन दिया कि इस बार सड़क बनवाएंगे जिससे जनता की उम्मीदें बंधी हैं. बता दें कि लीला साहू ने एक साल तक लगातार सोशल मीडिया और धरनों के माध्यम से आवाज उठाई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी काम नहीं हुआ. यहां तक कि कलेक्टर या सांसद ने ठोस समाधान नहीं दिया.
बता दें कि यह सड़क 30 से अधिक ग्रामीण बस्तियों और तहसीलों को जोड़ती है. बारिश में कीचड़ और गड्ढों से सड़कों का हाल ऐसा होता है कि लोगों को ट्रैक्टर से निकालना पड़ता है,लेकिन अधिकारी हमेशा से ही इस मामले में लीपापोती करते आए हैं.