Premanand Maharaj on Tattoo: आज के दौर में युवाओं के बीच शरीर पर टैटू बनवाने का चलन काफी बढ़ गया है। इनमें कई लोग अपनी पसंद, विचार या किसी खास व्यक्ति से जुड़ी याद को टैटू के जरिए जाहिर करते हैं। वहीं कुछ लोग भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी और दूसरे देवी-देवताओं के नाम या तस्वीर को भी शरीर पर गुदवा रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे अपनी आस्था दिखाने का माध्यम मानते हैं। लेकिन क्या भगवान का नाम या उनकी तस्वीर शरीर पर टैटू के रूप में बनवाना धार्मिक रूप से उचित है? क्या इसे भक्ति का हिस्सा माना जा सकता है? इसी तरह के सवाल पर संत प्रेमानंद महाराज ने एक सत्संग के दौरान अपनी बात रखी और भक्तों को भगवान के नाम को शरीर पर अंकित कराने से बचने की सलाह दी।
भक्त ने पूछा - राधा रानी के नाम का Tattoo बनवाना गलत तो नहीं?
सत्संग में एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से अपने हाथ पर बने राधा रानी के नाम के टैटू को लेकर सवाल किया। उसने जानना चाहा कि ऐसा करवाने से कहीं उससे कोई धार्मिक भूल तो नहीं हो गई। इस पर प्रेमानंद महाराज ने भगवान के नाम की पवित्रता और महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम श्रद्धा के साथ लेने और उसका स्मरण करने का अपना महत्व है। हालांकि, उनके अनुसार भगवान के नाम के साथ सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
शरीर पर भगवान का नाम या तस्वीर क्यों नहीं बनवानी चाहिए?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, देवी-देवताओं के नाम, मंत्र या उनके चित्र को शरीर पर स्थायी रूप से अंकित करवाने से बचना चाहिए। उनका तर्क है कि इंसान का शरीर हमेशा एक जैसी पवित्र अवस्था में नहीं रहता और रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की परिस्थितियों से गुजरता है। ऐसे में शरीर पर भगवान का नाम या स्वरूप अंकित होने के कारण ऐसी स्थितियां भी आ सकती हैं, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इसलिए उन्होंने भक्ति के लिए शरीर पर नाम लिखवाने के बजाय भगवान का स्मरण करने को अधिक उचित बताया।
मेहंदी में भगवान का नाम लिखने को लेकर भी दी सलाह
प्रेमानंद महाराज ने केवल टैटू ही नहीं, बल्कि हाथ या शरीर पर मेहंदी के जरिए देवी-देवताओं के नाम अथवा चित्र बनाने से भी बचने की बात कही। उनका मानना है कि भगवान के नाम को शरीर पर लिखने की जगह श्रद्धा से उसका जाप और मनन करना बेहतर है।
भगवान की भक्ति जताने का तरीका क्या होना चाहिए?
प्रेमानंद महाराज की इस सीख का मूल भाव यही है कि आस्था केवल शरीर पर किसी नाम या तस्वीर को अंकित कराने से नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचार, व्यवहार और कर्मों से दिखाई देनी चाहिए। भगवान का नाम लेने, मंत्रों का जाप करने, पूजा-पाठ करने और अच्छे आचरण के जरिए भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। उनके अनुसार भगवान का स्मरण मन से करना और उनके बताए मार्ग पर चलना ही भक्ति का अधिक सार्थक तरीका है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।