Premanand Maharaj के अनुसार जब किसी व्यक्ति पर भगवान की विशेष कृपा होती है, तो उसके जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। व्यक्ति का मन धीरे-धीरे भक्ति, सेवा और अच्छे कर्मों की ओर आकर्षित होने लगता है। कई बार इंसान खुद भी समझ नहीं पाता कि उसके भीतर इतना बदलाव कैसे आ रहा है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से इसे ईश्वर की कृपा का संकेत माना जाता है।
मन में बढ़ने लगती है शांति और संतोष की भावना
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि जिस व्यक्ति पर भगवान की कृपा होती है, उसके मन में बिना किसी बड़ी वजह के भी शांति बनी रहती है। ऐसे लोग छोटी-छोटी बातों पर परेशान नहीं होते और परिस्थितियां कठिन होने पर भी धैर्य बनाए रखते हैं। इसके अलावा उनके भीतर संतोष की भावना बढ़ती है और दूसरों के प्रति ईर्ष्या कम होने लगती है।
बुरे कार्यों से अपने आप बनने लगती है दूरी
भगवान की कृपा का एक बड़ा संकेत यह भी माना जाता है कि व्यक्ति गलत आदतों और बुरे कर्मों से दूरी बनाने लगता है। झूठ बोलना, दूसरों को नुकसान पहुंचाना या गलत रास्ते पर चलना उसे भीतर से परेशान करने लगता है। ऐसे लोग धीरे-धीरे सत्य, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने लगते हैं।
सत्संग और भक्ति में बढ़ने लगता है मन
जब ईश्वर की विशेष कृपा होती है तो व्यक्ति का मन भजन, पूजा और सत्संग की ओर आकर्षित होने लगता है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार ऐसे लोग बिना किसी दबाव के भगवान का नाम लेने में आनंद महसूस करते हैं। उन्हें अच्छे लोगों का साथ पसंद आने लगता है और नकारात्मक वातावरण से दूरी बनने लगती है। यह भी आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
कठिन समय में भी मिलती रहती है कोई न कोई मदद
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि जिन लोगों पर भगवान की कृपा होती है, उन्हें मुश्किल समय में भी किसी न किसी रूप में सहायता जरूर मिल जाती है। कई बार अचानक सही व्यक्ति का साथ मिलना, बड़ी समस्या का आसान समाधान निकल आना या संकट से बच जाना भी ईश्वर की कृपा का संकेत माना जाता है। ऐसे लोगों के जीवन में चुनौतियां तो आती हैं, लेकिन वे हर परिस्थिति से मजबूत होकर बाहर निकलते हैं।