मध्यप्रदेश में पारिवारिक विवाद और तलाक के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। परिवार न्यायालयों में हर साल संबंध विच्छेद और भरण-पोषण से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है। इसी समस्या को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्री-मैरिटल काउंसलिंग सेंटर शुरू करने की योजना बनाई है। ‘तेरे मेरे सपने’ नाम से प्रस्तावित इन केंद्रों के जरिए विवाह से पहले ही जोड़ों को रिश्तों की समझ और संवाद की अहमियत समझाने की कोशिश की जाएगी।
बढ़ते तलाक मामलों ने बढ़ाई चिंता
शहरों में तेजी से बदलती जीवनशैली और आपसी संवाद की कमी के कारण वैवाहिक रिश्तों में तनाव बढ़ता जा रहा है। परिवार न्यायालयों में तलाक और भरण-पोषण से जुड़े मामलों की संख्या हर साल बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई विवाद ऐसे होते हैं जिन्हें समय रहते बातचीत और समझदारी से सुलझाया जा सकता है। इसी सोच के साथ प्री-मैरिटल काउंसलिंग की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
‘तेरे मेरे सपने’ सेंटर की योजना
पिछले वर्ष नवंबर में आयोजित महिला जनसुनवाई के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने शहर में ‘तेरे मेरे सपने’ नाम से प्री-मैरिटल काउंसलिंग सेंटर शुरू करने की घोषणा की थी। स्थानीय प्रशासन ने उस समय एक महीने के भीतर सेंटर शुरू करने का आश्वासन दिया था। हालांकि चार महीने बीतने के बाद भी यह पहल अभी जमीन पर शुरू नहीं हो पाई है।
विवाह से पहले समझ और संवाद पर जोर
प्रस्तावित काउंसलिंग सेंटर का मुख्य उद्देश्य विवाह से पहले ही जोड़ों को रिश्तों की जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बारे में जागरूक करना है। प्रशिक्षित काउंसलर दोनों पक्षों से अलग-अलग और साथ में बातचीत करेंगे। इससे भविष्य में आने वाली संभावित समस्याओं को पहले ही समझकर समाधान सुझाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वैवाहिक जीवन अधिक संतुलित और मजबूत बन सके।
सफल मॉडल से मिली प्रेरणा
आयोग के अनुसार यह मॉडल महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पहले से सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। वहां इस पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब देशभर में शुरुआती चरण में करीब 100 प्री-मैरिटल काउंसलिंग सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई पहल
महिलाओं को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए आयोग कई अन्य कार्यक्रम भी चला रहा है। साइबर अपराध से बचाव के लिए ‘कैंपस कॉलिंग’ अभियान के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रों को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वहीं ‘यशोदा एआई’ कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी देकर डिजिटल रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।