प्रदेश में बुधवार को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश होने जा रहा है। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट सदन के पटल पर रखेंगे। यह बजट न केवल प्रदेश की आर्थिक दिशा तय करेगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता को बड़ी सौगातें देने का भी माध्यम बनेगा। यह अब तक का सबसे बड़ा बजट हो सकता है, जिसका आकार लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के आसपास अनुमानित है।
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान
सोमवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा पेश की। इसमें दावा किया गया कि पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है। वर्तमान में प्रदेश की जीएसडीपी 36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान अब 9 प्रतिशत से अधिक हो गया है। निवेश प्रस्ताव 50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं, जो 'सुरक्षा, स्थिरता और गति' की नीति का परिणाम बताया जा रहा है।
चुनावी साल, जनकल्याण पर जोर
चूंकि यह विधानसभा चुनाव से पहले का अंतिम पूर्ण बजट है, इसलिए सरकार जनता से जुड़ी योजनाओं पर जमकर खर्च करने की तैयारी में है। पिछले बजटों की तर्ज पर इस बार भी मेधावी बेटियों को मुफ्त स्कूटी योजना को मजबूती मिल सकती है। उच्च शिक्षा में पढ़ रही टॉप मेरिट वाली छात्राओं को स्कूटी वितरण की घोषणा संभावित है, जो पहले से चर्चा में रही है। साथ ही छात्रों को लैपटॉप या टैबलेट देने की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि शिक्षा और कौशल विकास को बल मिले।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि के भी आसार
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर भी बड़ा आवंटन होने की संभावना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास पर फोकस
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता मिलने वाली है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, हाईवे, नए मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों का विस्तार, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाले प्रावधान प्रमुख रहेंगे। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर ले जाना है, जिसके लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। विपक्ष इस बजट को लोकलुभावन करार दे सकता है, लेकिन सरकार इसे विकास और जनकल्याण का दस्तावेज बताएगी। बुधवार को सदन में पेश होने वाला यह बजट न केवल आर्थिक आंकड़ों का खजाना होगा, बल्कि आने वाले चुनावी समर की भी आधारशिला साबित हो सकता है।