UP की सियासत अब कथावाचक बनाम सपा की जंग में बदलती दिख रही है, क्योंकि कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के बयान पर अब सपा सांसद प्रिया सरोज ने ज़ोरदार पलटवार किया है.
लखनऊ की राजनीति में इन दिनों एक अनोखी जंग छिड़ी है कथा के मंच से लेकर संसद के गलियारों तक,जिसने सबका ध्यान खींचा है, क्योंकि कथावाचक अनिरुद्धाचार्य और समाजवादी पार्टी के बीच अब तकरार खुलकर सामने आ चुकी है. शुरुआत एक पुराने वीडियो से हुई जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से भगवान कृष्ण का पहला पुकार नाम पूछते नजर आते हैं और उन्हें 'शूद्र' शब्द के इस्तेमाल पर भी टोका जाता है. वीडियो वायरल होते ही अनिरुद्धाचार्य ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर निशाना साधा.उन्होंने कहा यूपी के एक पूर्व मुख्यमंत्री मुझसे कहते हैं कि तुम्हारा रास्ता अलग और मेरा रास्ता अलग... लेकिन जब मुसलमानों की बात होती है, तब वही नेता कहते हैं कि जो तुम्हारा रास्ता है, वही हमारा भी है. इस टिप्पणी के बाद बवाल तय था.
हिंदू-मुस्लिम जोड़कर माहौल बिगाड़ने का काम
अब इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा जब एक बाबा कृष्ण जी का नाम बताने में असफल हो जाता है, तो अपनी छवि सुधारने के लिए वह राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का नाम लेकर हिंदू-मुस्लिम जोड़कर देश-प्रदेश का माहौल बिगाड़ता है. क्या आप यही सब अपने प्रवचन में सिखाते हैं?
प्रिया सरोज का बयान सुर्खियों में छाया
प्रिया सरोज का यह बयान साफ इशारा करता है कि सपा इस मुद्दे को हल्के में नहीं ले रही. मछलीशहर से सांसद बनीं प्रिया सरोज ने न सिर्फ बाबा पर करारा हमला बोला, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा और साधु-संतों की राजनीति पर भी सवाल उठा दिए हैं. अब ये मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ी विचारधारा की लड़ाई का रूप लेता नजर आ रहा है एक तरफ संत समाज से जुड़ा व्यक्ति धर्म की बात कर रहा है, दूसरी ओर विपक्षी नेता इसे ‘राजनीतिक रंग’ देने का आरोप लगा रहे हैं. यूपी की सियासत में ये विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यहां धर्म, जाति और राजनीति तीनों की रेखाएं अक्सर एक-दूसरे को काटती नजर आती हैं.