Procurement stalled in Haryana mandis: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी Anurag Dhanda ने हरियाणा की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद के पहले ही दिन प्रदेश की 90% से अधिक मंडियों में कामकाज ठप रहा, जिससे हजारों किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसान सुबह से शाम तक अपनी फसल लेकर लाइन में खड़े रहे, लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी।
खरीद व्यवस्था पर सवाल
अनुराग ढांडा ने कहा कि राज्य में 1.2 लाख क्विंटल से ज्यादा सरसों मंडियों में पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी एजेंसियां 5% तक भी खरीद नहीं कर सकीं। उन्होंने इसे सरकार की नीयत और तैयारी दोनों पर सवाल उठाने वाला बताया। उनका कहना था कि जब सरकार ने 13 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया है, तो पहले ही दिन की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है।
आईटी सिस्टम की नाकामी
उन्होंने सरकार के आईटी सिस्टम पर भी सवाल उठाए। ढांडा के मुताबिक, ई-खरीद पोर्टल पूरी तरह फेल रहा, जिससे किसानों को गेट पास तक नहीं मिल सके। सर्वर क्रैश, डेटा वेरिफिकेशन में गड़बड़ी और सिस्टम अपडेट न होने के कारण हजारों किसानों को बिना खरीद के वापस लौटना पड़ा। उन्होंने पूछा कि जब खरीद की तारीख पहले से तय थी, तो सिस्टम को समय पर दुरुस्त क्यों नहीं किया गया।
मंडियों में बुनियादी
ढांडा ने मंडियों की बदहाल स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां न बारदाना उपलब्ध है, न तुलाई के लिए पर्याप्त कांटे और न ही मजदूर। इसके अलावा पीने के पानी, शौचालय और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान धूप में परेशान होते रहे, जबकि प्रशासनिक अधिकारी मौके से गायब रहे।
किसानों की मजबूरी
उन्होंने कहा कि सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन किसान 5300 से 5800 रुपये में अपनी फसल निजी व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं। ढांडा के अनुसार, यह दर्शाता है कि MSP केवल कागजों तक सीमित है और वास्तविकता में किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।