UP News: उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों में संपत्ति विवरण जमा करने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य में कुल 683 आईएएस अफसर हैं, लेकिन इनमें से मात्र 240 अधिकारियों ने ही अपनी चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा संबंधित सरकारी पोर्टल पर अपलोड किया है। बाकी 443 आईएएस अफसरों ने अब तक यह जानकारी साझा नहीं की है। यह मामला सामने आते ही योगी सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने गोपनीय रूप से एक आंतरिक अलर्ट जारी किया है, जिसमें इन अफसरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत अपनी संपत्तियों का विवरण अपडेट करें। खास बात यह है कि इन 443 में से 12 अधिकारी ऐसे भी हैं जिन्होंने जानकारी ड्राफ्ट मोड में तो सेव कर ली है, लेकिन उसे अंतिम रूप से सबमिट करने से बच रहे हैं।
31 जनवरी 2026 तक निर्देश
सरकारी नियमों के अनुसार, हर आईएएस अधिकारी को हर साल 31 जनवरी तक अपनी और परिवार की चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा स्पारो पोर्टल (या संबंधित ऑनलाइन सिस्टम) पर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होता है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार रोकथाम के लिए अहम मानी जाती है। केंद्र सरकार द्वारा भी हाल ही में सभी आईएएस अफसरों को 31 जनवरी 2026 तक 2025 कैलेंडर वर्ष की संपत्ति जानकारी जमा करने का सख्त निर्देश दिया गया है, जिसमें अनुपालन न करने पर विभागीय कार्रवाई और प्रमोशन रोकने की चेतावनी दी गई है।
अफसरों को अंतिम चेतावनी जारी
योगी सरकार ने इस मामले को अनुशासनहीनता का गंभीर उल्लंघन मानते हुए अफसरों को अंतिम चेतावनी जारी की है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यदि 31 जनवरी 2026 तक ये 443 अफसर अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें प्रमोशन रोकना, वेतन रोकना या अन्य विभागीय दंड शामिल हो सकते हैं।
खबर से हड़कंप मच गया
प्रशासनिक हलकों में इस खबर से हड़कंप मच गया है। कई वरिष्ठ अधिकारी इसे भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा मान रहे हैं। राज्य में पहले भी सरकारी कर्मचारियों के लिए मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति अपडेट अनिवार्य किया गया था, जिसमें समय पर अनुपालन न करने पर प्रमोशन और वेतन प्रभावित होने की बात कही गई थी।अब देखना यह है कि क्या ये 443 आईएएस अफसर समय रहते निर्देशों का पालन करते हैं या सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ते हैं।