Puja Bell Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने की परंपरा काफी पुरानी है। मंदिर में प्रवेश करते समय या घर के मंदिर में पूजा आरंभ करने से पहले घंटी बजाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घंटी की आवाज से पूजा का माहौल भक्तिमय बनता है और मन को एकाग्र करने में भी मदद मिलती है। हालांकि, पूजा के दौरान हर समय घंटी बजाते रहना जरूरी नहीं माना जाता। पूजा की अलग-अलग क्रियाओं के दौरान घंटी बजाने की अलग परंपराएं बताई गई हैं। आइए जानते हैं पूजा में घंटी बजाने का सही तरीका।
पूजा शुरू करते समय कितनी बार बजाएं घंटी?
पूजा आरंभ करने से पहले कुछ क्षण के लिए घंटी बजाई जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय 3 से 5 बार घंटी बजाना शुभ माना जाता है। घंटी को जोर-जोर से या लगातार बजाने के बजाय सहज और मध्यम आवाज में बजाना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूजा स्थल का वातावरण सकारात्मक होता है और व्यक्ति का ध्यान इधर-उधर की बातों से हटकर भगवान की आराधना में लगने लगता है।
आरती के समय बजा सकते हैं लगातार घंटी
घंटी बजाने का सबसे महत्वपूर्ण समय आरती के दौरान माना जाता है। आरती शुरू होने के बाद उसके पूरा होने तक घंटी बजाने की परंपरा कई जगहों पर निभाई जाती है। इस दौरान घंटी की आवाज बहुत तेज करने के बजाय एक समान गति और लय बनाए रखना अच्छा माना जाता है। आरती के समय घंटी की ध्वनि से वातावरण में भक्तिभाव बढ़ता है और पूजा में शामिल लोगों का ध्यान भी भगवान की ओर केंद्रित रहता है।
भगवान को भोग लगाते समय भी बजाएं घंटी
आरती के बाद जब भगवान को भोग अर्पित किया जाता है, तब भी थोड़ी देर के लिए घंटी बजाई जा सकती है। इस दौरान करीब 5 से 10 सेकंड तक सामान्य आवाज में घंटी बजाने की परंपरा बताई जाती है। भोग लगाते समय घंटी बजाना भी कई धार्मिक परंपराओं में पूजा का हिस्सा माना गया है। हालांकि, इस समय घंटी को लगातार बजाने या बहुत तेज आवाज करने की जरूरत नहीं होती।
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मंत्र जाप और ध्यान के दौरान न बजाएं
पूजा के दौरान कुछ ऐसे समय भी होते हैं जब घंटी बजाने से बचना बेहतर माना जाता है। खासतौर पर मंत्र जाप, ध्यान या शांत साधना करते समय घंटी की आवाज एकाग्रता में बाधा डाल सकती है। इसी तरह देर शाम या रात में पूजा करते समय भी आवाज का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आसपास के लोगों को परेशानी न हो।
घंटी बजाने का कोई एक कठोर नियम नहीं
घंटी बजाने को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिलता है। इसलिए इसे किसी अनिवार्य या कठोर नियम की तरह नहीं लेना चाहिए। पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, शुद्ध भाव और एकाग्रता का माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान घंटी बजाते समय आवाज और समय दोनों का ध्यान रखें और अपनी पारिवारिक या स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।