जम्मू के पुंछ में हुए बम धमाके ने एक गरीब किसान परिवार की खुशियों को चूर-चूर कर दिया। महज 20 साल के जवान ललित कुमार की शहादत से मेरठ के गांव में मातम पसर गया। रक्षाबंधन से पहले ही बहन काजल का रक्षा सूत्र सूना हो गया। भाई ने रक्षा का वादा किया था, लेकिन ड्यूटी निभाते हुए देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर गया। ललित अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था और पहली बार ही सेना में चयनित हुआ था।
पहली पोस्टिंग और आखिरी फोन कॉल
ललित को हाल ही में पहली पोस्टिंग मिली थी। 25 जुलाई की शाम सेना के अधिकारियों से परिवार को फोन आया और उनकी दुनिया बदल गई। बड़े भाई नितिन बताते हैं कि चयन की खबर आने पर पूरा गांव जश्न मना रहा था। छुट्टियों में घर आकर वह सबको खुशियां दे गया था, लेकिन अब वह सिर्फ यादों में रह गया।
बहन के अधूरे वादे और टूटे सपने
बहन काजल ने बताया कि भाई ने जम्मू से उनके लिए कुर्ती लाने का वादा किया था, लेकिन छुट्टियां खत्म होने के बाद वह वापस ड्यूटी पर चला गया। रक्षाबंधन पर आने का आश्वासन भी दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दो साल में वह सिर्फ एक बार राखी बांध पाई।
मां की आंखों में गर्व और आंसू
मां सरोज बाला कहती हैं कि बेटे ने बिना बताए सेना का फॉर्म भरा और चयन होने पर गर्व से उनके पैर छुए। ट्रेनिंग से लेकर ड्यूटी तक वह रोज फोन करता था, लेकिन हादसे से पहले सिर्फ दो बार ही बात हो पाई। आखिरी बार उसने कहा था- “जल्द ही घर आऊंगा।”
गांव में शोक, देश को मिला वीर सपूत
ललित ने सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। उसकी शहादत ने सभी को भावुक कर दिया है। रक्षाबंधन के इस मौके पर उसकी बहन के हाथ सूने रह गए, लेकिन देश ने एक सच्चा वीर खो दिया।