पंजाब पिछले एक महीने से भीषण बाढ़ संकट से जूझ रहा है। सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के उफान और लगातार बारिश से राज्य के 12 जिलों में भारी तबाही मची है। अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2.56 लाख लोग प्रभावित हैं। 1300 से ज्यादा गांव और 96,000 हेक्टेयर से अधिक खेतीबाड़ी जलमग्न हो चुकी है। NDRF, आर्मी और पुलिस राहत कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि राज्य सरकार ने इसे दशकों की सबसे गंभीर आपदा करार दिया है।
सबसे ज्यादा असर अमृतसर और फिरोजपुर में
अमृतसर में 35,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, वहीं फिरोजपुर में 24,000 और फाजिल्का में 21,500 से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर सहित 12 जिलों में करीब 1300 गांव डूब चुके हैं। सबसे ज्यादा 6 मौतें पठानकोट में दर्ज की गई हैं।
राहत-बचाव अभियान जारी
अब तक 15,600 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। गुरदासपुर से 5,549, फिरोजपुर से 3,321 और फाजिल्का से 2,049 लोगों को बचाया गया। NDRF की 20 टीमें, SDRF, सेना और पुलिस लगातार राहत-बचाव कार्य में लगी हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जिनमें हजारों मरीजों का इलाज किया गया।
शिक्षा संस्थान बंद, मेडिकल कैंप सक्रिय
पंजाब सरकार ने 3 सितंबर तक स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी बंद रखने का आदेश दिया है। फिरोजपुर जिले में 400 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जहां गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष देखभाल की जा रही है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री करेंगे दौरा
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया 2 से 4 सितंबर तक बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राज्य के 60,000 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। उन्होंने इसे "हाल के इतिहास की सबसे भीषण बाढ़" करार देते हुए प्रभावितों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
खेती और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
करीब 96,000 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। पशुधन और बुनियादी ढांचे का भी भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन का कहना है कि असली नुकसान का आकलन पानी उतरने के बाद ही हो पाएगा।