आईपीएल 2026 के शुरुआती दौर में पंजाब किंग्स की टीम किसी चैंपियन से कम नहीं दिख रही थी। 7 मुकाबलों में 6 जीत और एक रद्द मैच के साथ टीम अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंच गई थी। ऐसा लग रहा था कि इस बार पंजाब खिताब की सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरेगी। लेकिन सीजन का दूसरा हिस्सा आते ही कहानी अचानक बदल गई और जीत की रफ्तार पूरी तरह थम गई।
लगातार हार ने बढ़ाई मुश्किल
दूसरे चरण में पंजाब की हालत लगातार खराब होती चली गई। टीम ने अब तक खेले अपने सभी 6 मुकाबले गंवा दिए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिन मैदानों पर टीम को सबसे ज्यादा फायदा मिलना चाहिए था, वहीं सबसे बड़ा नुकसान हुआ। लगातार हार के बाद पंजाब अब प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर होने की कगार पर पहुंच गई है।
घर का मैदान नहीं बना सहारा
आईपीएल 2023 से पंजाब तीन घरेलू मैदानों पर खेल रही है। मोहाली, मुल्लांपुर और धर्मशाला टीम के होम ग्राउंड रहे हैं। लेकिन इन मैदानों पर पंजाब का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। 2023 से अब तक घरेलू मैदान पर खेले गए 27 मैचों में टीम को सिर्फ 8 जीत मिली जबकि 19 बार हार झेलनी पड़ी। यह रिकॉर्ड आईपीएल की सभी 10 टीमों में सबसे खराब माना जा रहा है।
धर्मशाला ने दिया सबसे बड़ा झटका
अगर धर्मशाला की बात करें तो आंकड़े और ज्यादा चौंकाने वाले हैं। पिछले चार सीजन में पंजाब ने वहां 8 मुकाबले खेले लेकिन सिर्फ एक बार जीत हासिल की। बाकी 7 मैचों में हार मिली। मोहाली में भी हाल अच्छे नहीं रहे, जबकि मुल्लांपुर में भी टीम जीत से ज्यादा हारती नजर आई। यानी घरेलू मैदान पंजाब के लिए ताकत नहीं बल्कि परेशानी बन गए।
बाकी टीमों से बहुत पीछे निकली पंजाब
जहां दूसरी टीमें अपने घरेलू मैदानों को जीत का गढ़ बना रही हैं, वहीं पंजाब पीछे छूटती दिख रही है। बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई जैसी टीमों ने अपने घर में शानदार रिकॉर्ड बनाए हैं। लेकिन पंजाब का आंकड़ा सबसे नीचे खड़ा है। यही वजह है कि टीम का मजबूत आगाज भी अब फीका पड़ गया है।
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अब सवालों के घेरे में पूरी रणनीति
अब बड़ा सवाल सिर्फ खिलाड़ियों पर नहीं बल्कि पूरी रणनीति पर उठ रहा है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि पंजाब अपने ही मैदान पर लगातार संघर्ष कर रही है। क्या बार-बार मैदान बदलना वजह है या दबाव में टीम टूट रही है? फिलहाल इतना साफ है कि जिस घर को पंजाब का सबसे बड़ा सहारा बनना था, वही इस सीजन सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो गया।