पंजाब में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल के मामलों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की है। सरकार का कहना है कि पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि हाईटेक तरीके से नकल करने वाले गिरोह पर कार्रवाई की गई। इसी बीच CJP की पंजाब मामले में धीमी प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई है।
पंजाब में परीक्षा विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
पंजाब में पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मुद्दा अब सियासी बहस के केंद्र में है। कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने भगवंत मान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का दावा है कि पिछले करीब साढ़े चार वर्षों में कई परीक्षाओं से जुड़े मामले सामने आए हैं। इनमें नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, कृषि अधिकारी भर्ती परीक्षा, फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा, 12वीं कक्षा की अंग्रेजी परीक्षा और ग्रुप-बी से जुड़ी परीक्षा के मामले शामिल बताए जा रहे हैं।
फार्मासिस्ट परीक्षा मामले ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल
फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़ी फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में कथित नकल का मामला सामने आने के बाद विवाद और तेज हुआ। आरोप है कि परीक्षा में पेन कैमरा और ब्लूटूथ जैसे हाईटेक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में आरोपियों को पकड़े जाने की बात सामने आई। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा में इस तरह की गड़बड़ी को केवल नकल कहकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता, क्योंकि इससे पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है।
भगवंत मान सरकार का पेपर लीक से इनकार
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने विपक्ष के पेपर लीक के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि उसके कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। सरकार के मुताबिक, जिस मामले को पेपर लीक बताया जा रहा है, वह दरअसल हाईटेक नकल से जुड़ा था और पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। दूसरी ओर विपक्ष इसे सरकार की व्यवस्था संबंधी विफलता बता रहा है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता प्रभावित होना अपने आप में गंभीर विषय है।
मंत्रियों के इस्तीफे की मांग पर बढ़ा दबाव
पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। केंद्र में पेपर लीक के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने वाली आम आदमी पार्टी से पंजाब में भी समान रुख की अपेक्षा की जा रही है। इसी को लेकर राजनीतिक विरोधाभास का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।
पंजाब में CJP की एंट्री पर अभी इंतजार
दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर आंदोलन के बाद चर्चा में आए CJP से भी पंजाब के मामले पर सक्रिय होने की मांग उठ रही है। बीजेपी नेताओं ने संगठन से सवाल किया है कि जब परीक्षा संबंधी मुद्दों पर छात्रों के पक्ष में आवाज उठाने की बात कही गई थी, तो पंजाब के छात्रों के मामले में अभी तक सड़क पर आंदोलन क्यों नहीं किया गया। हालांकि CJP की ओर से संकेत दिया गया है कि पंजाब के मुद्दे पर आगे की रणनीति जल्द बताई जाएगी। संगठन का कहना है कि दिल्ली का आंदोलन हाल ही में खत्म हुआ है और पंजाब में उतरने से पहले टीम तैयारी कर रही है। ऐसे में फिलहाल CJP का रुख 'वेट एंड वाच' वाला नजर आ रहा है।