पंजाब की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां भगवंत मान सरकार ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। आम आदमी पार्टी के कुछ सांसदों की बगावत के बाद पार्टी नेतृत्व अब राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय हो गया है। इसी के तहत 1 मई को विशेष सत्र बुलाया गया है।
6 महीने के लिए सुरक्षित होगी सरकार
सूत्रों के अनुसार, इस विशेष सत्र में सरकार विश्वास प्रस्ताव पेश कर सकती है। यदि विधानसभा में बहुमत साबित हो जाता है, तो अगले 6 महीने तक सरकार को कोई खतरा नहीं रहेगा। यह कदम राजनीतिक अनिश्चितता को खत्म करने और विपक्ष के दबाव को कम करने के लिए अहम माना जा रहा है।
बगावत के बाद बढ़ी चिंता
दरअसल, हाल ही में राज्यसभा के कई सांसदों के पाला बदलने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ विधायक भी दल बदल सकते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल करने वाली सरकार अब किसी भी तरह की टूट से बचना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी संवैधानिक तरीके से अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
कैबिनेट बैठक के बाद रणनीति तय
विधानसभा के विशेष सत्र से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक भी बुलाई गई है। इस बैठक में सरकार अपनी आगे की रणनीति को अंतिम रूप देगी। इसके बाद ही विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पहले भी ला चुकी है प्रस्ताव
यह पहली बार नहीं है जब पंजाब सरकार विश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भी सरकार ने इसी तरह का प्रस्ताव लाकर बहुमत साबित किया था। उस समय भी विपक्ष पर विधायकों को तोड़ने के आरोप लगाए गए थे।
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विपक्ष पर भी निशाना
सत्तारूढ़ दल का मानना है कि विपक्ष सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में विश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसके पास अभी भी स्पष्ट बहुमत है और वह मजबूत स्थिति में है।
आने वाले दिनों पर नजर
अब सभी की नजर 1 मई को होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी है। यह सत्र तय करेगा कि सरकार कितनी मजबूती से अपने बहुमत को साबित कर पाती है और क्या सियासी संकट पूरी तरह टल पाएगा या नहीं।