अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां पहले पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में था, वहीं अब रूस ने सीधे इस प्रक्रिया में एंट्री ले ली है। व्लादिमीर पुतिन खुद शांति समझौते की कमान संभालते नजर आ रहे हैं।
रूस ने संभाली सक्रिय भूमिका
रूस के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने साफ कहा है कि मध्य पूर्व में शांति के लिए रूस हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन खुद इस मामले में सक्रिय होकर योजना तैयार कर रहे हैं और अलग-अलग देशों से संपर्क बना रहे हैं।
पाकिस्तान क्यों रहा पीछे
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा था, लेकिन एक हफ्ते से ज्यादा समय बीतने के बाद भी वह दोनों देशों को बातचीत की मेज पर नहीं ला सका। इसके अलावा उसके विदेश मंत्री अन्य मुद्दों में व्यस्त रहे, जिससे उसकी भूमिका कमजोर पड़ गई।
हमले और अविश्वास ने बढ़ाई दूरी
स्थिति और जटिल तब हो गई जब जिस नेता के जरिए संदेश भेजे जा रहे थे, उस पर हमला हो गया। इसके अलावा ईरान ने साफ कहा है कि जब तक उसे यह भरोसा नहीं होगा कि आगे हमला नहीं होगा, तब तक वह किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा।
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पुतिन का नया शांति प्लान
रूस के राष्ट्रपति पुतिन अब एक नए शांति प्लान पर काम कर रहे हैं। इसके तहत वे उन देशों से संपर्क कर रहे हैं जो इस जंग में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कई देशों के नेताओं से बातचीत कर इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
आगे क्या होगा सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रूस इस तनाव को खत्म कराने में सफल होगा या नहीं। जिस तरह हालात तेजी से बदल रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में इस जंग और कूटनीति का रुख पूरी तरह बदल सकता है।