BRICS SECURITY: दिल्ली में 18वें BRICS सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी के बीच दोनों नेताओं की सुरक्षा भी चर्चा का विषय है। पुतिन की सुरक्षा में कई स्तरों वाली व्यवस्था और विशेष सुरक्षा टीमें तैनात रहती हैं, जबकि जिनपिंग की सुरक्षा में निगरानी और पूरे माहौल को नियंत्रित करने पर जोर दिया जाता है। दोनों देशों का सुरक्षा मॉडल काफी अलग है।
पुतिन की सुरक्षा कौन संभालता है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा मुख्य रूप से रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस संभालती है। इसके साथ खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों तथा रूसी नेशनल गार्ड यानी रोसगवार्डिया की भी भूमिका रहती है। पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों में बनाई गई है, ताकि किसी संभावित खतरे की पहचान उनके करीब पहुंचने से पहले ही की जा सके।
चार घेरे में पुतिन की सुरक्षा
पुतिन के सुरक्षा घेरे में सबसे अंदर क्लोज प्रोटेक्शन टीम होती है, जिसमें व्यक्तिगत बॉडीगार्ड शामिल रहते हैं। इसके बाद सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी भीड़ के बीच निगरानी रखते हैं। तीसरे घेरे में हथियारबंद कमांडो आवाजाही को नियंत्रित करते हैं, जबकि चौथे घेरे में स्नाइपर और लंबी दूरी की सुरक्षा टीम तैनात हो सकती है। उनके काफिले में भारी सुरक्षा वाली गाड़ियां और अलग-अलग सुरक्षा इंतजाम भी शामिल हो सकते हैं।
तकनीक और खाने तक की जांच
पुतिन की सुरक्षा में आधुनिक संचार और साइबर सुरक्षा का इस्तेमाल भी किया जाता है। उनके काफिले और यात्रा को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। खाने और पीने की चीजों की भी कड़ी जांच की जाती है। सुरक्षा व्यवस्था का मकसद संभावित खतरे को पहले ही पहचानना और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करना होता है।
जिनपिंग की सुरक्षा का तरीका अलग
शी जिनपिंग की सुरक्षा चीन का सेंट्रल गार्ड ब्यूरो संभालता है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था में राष्ट्रपति के आसपास के पूरे माहौल को नियंत्रित करने और लगातार निगरानी रखने पर खास जोर रहता है। जिनपिंग के दौरे से पहले चीनी सुरक्षा और खुफिया अधिकारी संबंधित जगहों का निरीक्षण करते हैं और मेजबान देश की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करते हैं।
होटल से नेटवर्क तक निगरानी
विदेशी यात्राओं के दौरान जिनपिंग जहां ठहरते हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था काफी पहले से तैयार की जाती है। संचार, नेटवर्क और होटल के इंफ्रास्ट्रक्चर की भी सुरक्षा जांच की जा सकती है। सादे कपड़ों में सुरक्षा कर्मी भी तैनात किए जा सकते हैं, जो स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर संभावित खतरों का आकलन करते हैं। यानी जिनपिंग की सुरक्षा में सिर्फ बॉडीगार्ड नहीं, बल्कि पूरे वातावरण पर निगरानी अहम हिस्सा है।
तो किसकी सुरक्षा ज्यादा मजबूत?
दोनों नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत है, लेकिन दोनों का तरीका अलग है। पुतिन की सुरक्षा में कई सुरक्षा घेरे, हथियारबंद टीमें, सुरक्षित काफिला और तत्काल कार्रवाई पर ज्यादा जोर दिखाई देता है। वहीं जिनपिंग की सुरक्षा रणनीति में निगरानी, खुफिया जानकारी और आसपास के माहौल को नियंत्रित करने पर ज्यादा ध्यान रहता है। इसलिए किसी एक को सीधे ज्यादा सुरक्षित कहना मुश्किल है—दोनों देशों ने अपने-अपने तरीके से बेहद कड़े सुरक्षा मॉडल तैयार किए हैं।