Putins India visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4–5 दिसंबर को भारत के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हो रही है, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और खासकर रक्षा सहयोग पर बड़ी बातचीत होने की संभावना है। माना जा रहा है कि S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से लेकर रूस के अत्याधुनिक Su-57 लड़ाकू विमान तक पर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुतिन के सम्मान में रात्रिभोज भी देंगी, जिससे यह दौरा कूटनीतिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
Su-57 पर बिग डील की संभावनाएं
रूस भारत को Su-57 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट का प्रस्ताव पहले ही दे चुका है, जिसमें भारत में सह-उत्पादन का विकल्प भी शामिल है। यह विमान स्टील्थ तकनीक, लंबी दूरी की मारक क्षमता और मल्टीरोल युद्धक क्षमता के कारण अमेरिकी F-35 का विकल्प माना जाता है। मैक-2 की स्पीड, अत्याधुनिक AESA रडार और 300 किमी मारक क्षमता वाली R-37M मिसाइल इसे और भी खतरनाक बनाती है। यदि भारत Su-57 को वायुसेना में शामिल करता है, तो चीन और पाकिस्तान से दो-तरफा चुनौतियों के बीच इसकी सैन्य ताकत कई गुना बढ़ सकती है। इसके साथ ही यह डील मेक इन इंडिया को भी नई ऊंचाई देगी।
अमेरिका की बढ़ी चिंता
पुतिन का यह दौरा अमेरिका के लिए भी चर्चा का विषय है, क्योंकि वाशिंगटन पहले ही चाहता था कि भारत रूस पर ऊर्जा और रक्षा निर्भरता कम करे। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश भी की, लेकिन नई दिल्ली ने संतुलित कूटनीति अपनाते हुए रूस से संबंध बरकरार रखे। यही वजह है कि पुतिन भारत को “सबसे भरोसेमंद मित्र” बताते रहे हैं। माना जा रहा है कि दौरे के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बातचीत होगी, साथ ही कुछ ऐसे समझौते भी संभव हैं, जो वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को और मजबूत करेंगे।