MP PWD Engineering Research Centre -मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अब पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) इंजीनियरों के लिए देश का पहला अत्याधुनिक इंजीनियरिंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर बनने जा रहा है। करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह सेंटर इंजीनियरिंग प्रशिक्षण और सड़कों की गुणवत्ता जांच के लिए देश में नया मानक स्थापित करेगा। यहां वर्ल्ड-क्लास टेस्टिंग लैब भी बनाई जाएगी, जिससे क्वालिटी इंजीनियर तैयार होंगे।
100 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा अत्याधुनिक केंद्र
लोक निर्माण विभाग की योजना के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 100 करोड़ रुपए रखी गई है। सेंटर में आधुनिक लैब, रिसर्च हॉल, डिजिटल ट्रेनिंग रूम और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्वालिटी चेकिंग यूनिट बनाई जाएगी। यह सुविधा प्रदेश के इंजीनियरिंग क्षेत्र को नई दिशा देगी और सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में सुधार लाएगी।
देश का पहला राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग ट्रेनिंग सेंटर
यह देश का पहला ऐसा राज्य स्तरीय केंद्र होगा, जहां पीडब्ल्यूडी, रोड डेवलपमेंट और बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के इंजीनियरों को तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा। फिलहाल राज्य के इंजीनियरों को हैदराबाद, दिल्ली या गुजरात जैसे शहरों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है, जिस पर हर साल करीब 15 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। नए सेंटर के बनने से यह खर्चा बचेगा।
इंजीनियरिंग छात्रों के लिए बनेगा बड़ा प्लेटफॉर्म
यह संस्थान न केवल सरकारी इंजीनियरों बल्कि निजी तकनीकी पेशेवरों और इंजीनियरिंग छात्रों के लिए भी अवसर खोलेगा। रिसर्च प्रोजेक्ट्स, नई तकनीक और सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले आधुनिक मटेरियल की जांच यहीं की जाएगी। इससे एमपी इंजीनियरिंग इनोवेशन का केंद्र बन सकेगा।
क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का उद्देश्य है कि इस सेंटर से निकलने वाले इंजीनियर विश्वस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करें। इससे सड़कों, पुलों और इमारतों की गुणवत्ता में सुधार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए इंजीनियरिंग रिसर्च का आदर्श मॉडल साबित होगा।