Big Claim on Iran-US Talks: पाकिस्तानी विश्लेषक कमर चीमा ने मौजूदा भू-राजनीतिक हालात के बीच पाकिस्तान और तुर्किए के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि तुर्किए नहीं चाहता था कि ईरान, अमेरिका और इजरायल से जुड़े मुद्दों पर मुस्लिम देशों की अहम बैठक इस्लामाबाद में हो। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
तुर्किए की मंशा पर सवाल
कमर चीमा ने कहा कि तुर्की चाहता था कि यह अहम बैठक उसके यहां आयोजित हो। उनके मुताबिक, हर देश चाहता है कि ऐसी महत्वपूर्ण बातचीत उसकी मेजबानी में हो ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी भूमिका मजबूत दिखे। हालांकि, अन्य देशों की सहमति से यह बैठक पाकिस्तान में आयोजित हुई।
इस्लामाबाद में हुई अहम बैठक
हाल ही में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्रियों ने बैठक की। इस दौरान इशाक दर से भी बातचीत हुई। बैठक में मुख्य रूप से Iran से जुड़े तनाव और क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों पर चर्चा की गई।
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पाकिस्तान की बढ़ती अहमियत का दावा
कमर चीमा ने यह भी कहा कि वर्तमान हालात में पाकिस्तान की वैश्विक अहमियत बढ़ी है। उनके अनुसार, 20 से ज्यादा देशों ने ईरान से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान से संपर्क किया है। उनका दावा है कि कई देशों के नेता पाकिस्तान के नेतृत्व से बातचीत कर रहे हैं, जिससे उसकी कूटनीतिक भूमिका मजबूत हुई है।
बातचीत पर बड़ा संकेत
चीमा ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर अन्य देशों को जानकारी दी है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इससे क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान की सक्रियता जरूर सामने आती है।