Rabri Devi House: पटना का 10 सर्कुलर रोड आवास, जो कभी लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सत्ता का केंद्र माना जाता था, अब नए विवाद में है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को यह बंगला खाली करने का आदेश जारी किया है, क्योंकि नई आवास नीति के तहत उन्हें हार्डिंग रोड स्थित नया घर आवंटित किया गया है। राबड़ी देवी फिलहाल बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं, इसलिए प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पुराने आवास पर उनका रहना अब नियमों के खिलाफ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि राबड़ी देवी इस सरकारी आवास को छोड़ने से इनकार कर देती हैं, तो क्या कार्रवाई की जा सकती है और क्या सरकार कानूनी रूप से उन्हें जबरन बेदखल करा सकती है।
क्या कहते हैं सरकारी नियम?
भारत में सभी सरकारी आवास पद और कार्यकाल के अनुसार दिए जाते हैं। जैसे ही पद बदलता है या नया घर आवंटित होता है, पुराने आवास को खाली करना अनिवार्य हो जाता है। इस नियम का आधार है ‘पब्लिक प्रिमाइसेस (इविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्युपेंट्स) एक्ट, 1971’। इस कानून के तहत पहले नोटिस जारी होता है और निर्धारित समय में आवास खाली करना जरूरी होता है। समय सीमा गुजरने पर यह कब्जा “अनधिकृत” घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद जिला प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है, जिसमें पुलिस बल की सहायता से बेदखली तक शामिल है।
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सरकार के पास क्या हैं कदम?
अगर राबड़ी देवी आवास खाली न करने का फैसला करती हैं, तो सरकार के सामने कई वैधानिक विकल्प होंगे। पहले चरण में दूसरा रिमाइंडर नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद कब्जे को अनधिकृत घोषित कर जिला प्रशासन मामले को अपने हाथ में ले सकता है। आवश्यकता पड़ने पर DM की निगरानी में पुलिस की मदद से घर खाली कराया जा सकता है, हालांकि VIP मामलों में यह अंतिम विकल्प माना जाता है। नियम साफ कहते हैं कि सरकार के पास कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन राबड़ी देवी की पूर्व मुख्यमंत्री की स्थिति और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए संभावना यही है कि मामला बातचीत या औपचारिक प्रक्रिया से ही सुलझाया जाएगा।