ईरान और इजरायल के बीच भड़कती जंग अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। पांचवें दिन भी दोनों देशों के बीच भारी हमले जारी हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत तेहरान छोड़ने की एडवाइजरी जारी कर दी है। इजरायल के हवाई हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हो चुकी है, जबकि ईरान की जवाबी कार्रवाई में इजरायल में भी नागरिक हताहत हुए हैं। इस युद्ध के बीच अमेरिका और अन्य वैश्विक ताकतों की सक्रियता बढ़ गई है, लेकिन फिलहाल युद्धविराम की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।
तेहरान में बिगड़ते हालात के बीच भारत की चेतावनी
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने मंगलवार को पांचवे दिन में प्रवेश कर लिया है। युद्ध के तेज़ होते हमलों और बढ़ती मौतों को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की एडवाइजरी जारी की है। तेहरान में रह रहे भारतीयों से कहा गया है कि वे बिना देर किए सुरक्षित रास्तों के ज़रिए देश छोड़ दें।
अब तक 224 ईरानी और 24 इजरायली नागरिकों की मौत
इस युद्ध में अब तक ईरान में 224 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, परमाणु वैज्ञानिक और आम नागरिक शामिल हैं। वहीं इजरायल का दावा है कि ईरान के मिसाइल हमलों में उनके यहां महिलाओं और बच्चों सहित 24 नागरिक मारे गए हैं।
इजरायली मिसाइलों ने ईरानी परमाणु ढांचे को नुकसान पहुंचाया
इजरायल ने शुक्रवार को ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर जबरदस्त हवाई हमले किए, जिससे पूरे मध्य पूर्व में हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजरायली हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को "काफी पीछे धकेल दिया" है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे ईरान को लंबे समय तक झटका लगेगा।
अमेरिका का इशारा- युद्ध में बढ़ेगी भागीदारी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो कनाडा में चल रहे G-7 सम्मेलन में शामिल थे, एक दिन पहले ही सम्मेलन छोड़कर रवाना हो गए हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अब इस संघर्ष में और गहरी भूमिका निभा सकता है। ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों से भी ईरान को तुरंत खाली करने की अपील की है।
वार्ता ठप, परमाणु समझौता अधर में
ईरान और अमेरिका के बीच पहले चल रही परमाणु समझौते की वार्ता भी अब अधर में लटक गई है। इजरायल के हमले के बाद तेहरान ने किसी भी तरह की युद्धविराम बातचीत से इनकार कर दिया है। इसका सीधा असर वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ता दिख रहा है।