Air Force strength: केंद्र सरकार ने फ्रांस से अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। इस निर्णय को भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता और रणनीतिक बढ़त को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पहले से शामिल राफेल विमानों ने हालिया अभियानों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
पहले से तैनात राफेल
भारत पहले ही 36 राफेल विमान शामिल कर चुका है, जिनकी तैनाती अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर की गई है। ये विमान अत्याधुनिक हथियारों और उन्नत एवियोनिक्स से लैस हैं। वायुसेना के अनुसार, इनकी मौजूदगी से सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर एयर डिफेंस संभव हुआ है।
लंबी दूरी की सटीक मार
राफेल में लगी मेटियोर मिसाइल 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हवा में लक्ष्य भेदने में सक्षम मानी जाती है। वहीं SCALP क्रूज मिसाइल लंबी दूरी से जमीनी ठिकानों पर सटीक हमला कर सकती है। इसके अलावा हैमर जैसे स्मार्ट हथियार मजबूत संरचनाओं को निशाना बनाने में उपयोगी हैं।
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उन्नत तकनीक की ढाल
इस फाइटर जेट में RBE2 AESA रडार लगा है, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम विमान को दुश्मन की निगरानी और मिसाइल खतरों से बचाने में मदद करता है। हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम पायलट को रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराता है।
नौसेना को भी मजबूती
हाल ही में 26 राफेल-मरीन विमानों के लिए भी समझौता किया गया था। ये जेट विमानवाहक पोतों से संचालन के लिए तैयार किए गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सौदों से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और समुद्री सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।