राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा सियासी संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी या हार न समझा जाए। वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए और खुद को जनता की आवाज बताया। इस घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी को खुलकर सामने ला दिया है।
पद से हटे, फिर दिया करारा जवाब
राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद ही राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है, लेकिन वह हारे नहीं हैं। उनका बयान सीधे तौर पर पार्टी के फैसले पर सवाल खड़ा करता नजर आया।
“जनता की बात करना क्या गुनाह है?”
अपने वीडियो संदेश में चड्ढा ने कहा कि वह हमेशा संसद में जनता के मुद्दे उठाते रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आम लोगों की समस्याओं को उठाना गलत है। उनका कहना था कि उनके मुद्दों से जनता को फायदा हुआ, लेकिन शायद पार्टी को यह रास नहीं आया।
राज्यसभा में बोलने पर भी लगी रोक
पार्टी द्वारा राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उन्हें उपनेता पद से हटाने के साथ-साथ सदन में बोलने के समय से भी वंचित करने की बात कही गई। उनके स्थान पर दूसरे सांसद का नाम प्रस्तावित किया गया, जिससे साफ संकेत मिला कि पार्टी अब उन्हें प्रमुख भूमिका में नहीं देख रही है।
करीबी से टकराव तक का सफर
राघव चड्ढा कभी पार्टी नेतृत्व के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे। पंजाब और दिल्ली की राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही है। लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी अनुपस्थिति और चुप्पी ने रिश्तों में खटास बढ़ा दी, जो अब खुलकर सामने आ रही है।
बढ़ती दूरी और सियासी संकेत
हाल के महीनों में कई बड़े मौकों पर राघव चड्ढा की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। पार्टी के कार्यक्रमों और अभियानों से उनकी दूरी बढ़ती गई। अब उनके ताजा बयान से साफ है कि यह विवाद केवल पद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी सियासी खाई बन चुकी है।