
हाल ही में संसद से चुनाव आयोग तक ‘वोट चोरी’ के खिलाफ मार्च में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की एक तस्वीर खूब वायरल हुई, जिसमें वह राहुल गांधी के साथ बेरिकेड कूदते नजर आए. इसे राहुल के लिए उनका मजबूत समर्थन माना गया. लेकिन असल चिंता ये है कि यूपी में सपा के लिए सबसे बड़ा खतरा अब भाजपा नहीं, बल्कि राहुल गांधी की कांग्रेस बनती दिख रही है.
27 में गठबंधन की गारंटी नहीं?
कांग्रेस नेता अजय राय ने साफ कहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव में गठबंधन की गारंटी नहीं है और पार्टी अकेले दम पर लड़ने की तैयारी में है. वहीं कांग्रेस के मुस्लिम नेता इमरान मसूद ने तो यहां तक कह दिया कि सपा से गठबंधन कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहा है और कांग्रेस को किसी से सीटों के लिए “भीख” नहीं मांगनी चाहिए.
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कांग्रेस का बढ़ता कद और अखिलेश की दुविधा
सपा की राजनीति यादव-मुस्लिम समीकरण पर टिकी है. अगर कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाती है, तो सपा की सीटें घट सकती है. 2019 में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 6.36% था, जो 2024 में बढ़कर 9.7% हो गया. सीटें भी 1 से बढ़कर 6 हो गईं. ये संकेत हैं कि कांग्रेस यूपी में अपना आधार मजबूत कर रही है, जो सपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है, खासकर 2027 के चुनाव से पहले. अखिलेश के लिए यह राजनीतिक दुविधा है. अभी भाजपा को रोकने के लिए राहुल गांधी के साथ खड़े रहना जरूरी है, लेकिन आगे यही दोस्त सपा के वोट बैंक के लिए चुनौती बन सकता है.
आंकड़ों से समझिए चुनावी तस्वीर
019 में यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 6.36% था, जो 2024 में बढ़कर 9.7% हो गया. यानी करीब 3.3% की बढ़ोतरी. सीटों के लिहाज से भी बड़ा बदलाव आया. 2019 में जहां कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली थी, वहीं 2024 में 17 में से 6 सीटें जीत लीं.
सपा ने भी इस बार जोरदार प्रदर्शन किया. 2019 में 5 सीटों पर सिमटी सपा ने इंडिया गठबंधन के तहत 37 सीटें जीतीं. कुल 43 सीटों में से 6 कांग्रेस और 37 सपा के खाते में गईं, जिससे बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई. हालांकि सपा और कांग्रेस का साथ हर बार सफल नहीं रहा, याद कीजिए “दो लड़कों की दोस्ती” वाला चुनाव, जो फ्लॉप साबित हुआ था.