दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शर्टलेस प्रोटेस्ट पर पुलिस कार्रवाई ने सियासी माहौल गरमा दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस एक्शन को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आत्मा है और इसे अपराध की तरह देखना देश को खतरनाक दिशा में ले जा रहा है।
‘Compromised PM’ और नॉर्थ कोरिया से तुलना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज भारत में शांतिपूर्ण विरोध करना सबसे बड़ा “अपराध” बना दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को “Compromised PM” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार असहमति को दबाने का काम कर रही है। राहुल ने कहा, “ये भारत है, नॉर्थ कोरिया नहीं। लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं होता।”
उन्होंने दावा किया कि अगर कोई नागरिक संवैधानिक तरीके से सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाता है तो उसे लाठी, मुकदमे और जेल का सामना करना पड़ता है।
कई आंदोलनों का जिक्र कर साधा निशाना
राहुल गांधी ने अपने बयान में पेपर लीक से परेशान युवाओं, महिला पहलवानों के आंदोलन, बलात्कार पीड़िता के समर्थन में हुए प्रदर्शन, किसानों के आंदोलन और पर्यावरण को लेकर उठी आवाज़ों का जिक्र किया। उनका आरोप है कि हर मामले में विरोध को दबाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि जब सरकार आलोचना सुनने के बजाय उसे “साजिश” या “देशविरोध” बताने लगे, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। राहुल के मुताबिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र की ताकत है, कमजोरी नहीं।
शिमला से गिरफ्तारी, कुल 11 आरोपी
शर्टलेस प्रोटेस्ट मामले में पुलिस कार्रवाई जारी है। दिल्ली में एआई समिट के दौरान हुए प्रदर्शन के सिलसिले में तीन और कार्यकर्ताओं को हिमाचल प्रदेश के शिमला से हिरासत में लिया गया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 11 हो गई है।
पुलिस की विशेष टीम ने आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
सियासी बहस तेज, लोकतंत्र पर टकराव
इस घटनाक्रम के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दलील दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सड़कों दोनों पर गूंज सकता है।
अब देखना होगा कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या लोकतांत्रिक अधिकारों पर बड़ी बहस का रूप लेता है।