बजट सत्र 2026 के दौरान संसद में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस के बीच एक किताब का जिक्र कर दिया गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जैसे ही उस किताब के अंश पढ़ने शुरू किए, सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। सवाल उठने लगा कि आखिर वह कौन-सी किताब थी, जिसका हवाला देकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू हुआ विवाद
संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान राहुल गांधी ने सदन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने डोकलाम विवाद का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े किए, जिसके बाद बहस ने तीखा रूप ले लिया।
किस किताब का दिया गया हवाला?
अपने भाषण में राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक किताब का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वे जनरल नरवणे के संस्मरणों यानी मेमोइर के कुछ अंश पढ़ रहे हैं। राहुल गांधी का दावा था कि इस किताब में डोकलाम विवाद के दौरान की अहम घटनाओं का जिक्र है, जो उस समय की गंभीर स्थिति को दिखाता है।
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डोकलाम और चीन का मुद्दा
राहुल गांधी ने दावा किया कि डोकलाम विवाद के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा के काफी करीब तक पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि यह बात उसी किताब में दर्ज है, जिसका वे उल्लेख कर रहे हैं। इसी दावे पर भाजपा सांसदों ने कड़ा ऐतराज जताया और सदन में शोरगुल तेज हो गया।
सरकार की आपत्ति और पलटवार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। ऐसे में उसके अंश पढ़ना संसदीय नियमों के खिलाफ है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि किसी मैगजीन या अप्रमाणित स्रोत के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बयान देना ठीक नहीं है।
स्पीकर का हस्तक्षेप
बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में केवल वही दस्तावेज या सामग्री पढ़ी जा सकती है, जो सार्वजनिक और प्रमाणित हो। अप्रकाशित संस्मरणों के अंश पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद यह विवाद संसद के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हो गया।